गाजियाबाद के निजी स्कूलों की सुस्ती, सरकारी शिक्षक करेंगे अपार आईडी जनरेशन में मदद
गाजियाबाद में अपार (आटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) आईडी बनाने की प्रक्रिया में निजी स्कूल काफी सुस्त नजर आ रहे हैं। सरकारी स्कूलों ने इस दिशा में लगभग अपना काम पूरा कर लिया है, लेकिन निजी स्कूलों में अभी भी बड़ी संख्या में छात्र इस महत्वपूर्ण डिजिटल पहचान से वंचित हैं। इस समस्या के समाधान के लिए अब सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की मदद ली जाएगी।
सरकारी शिक्षक निजी स्कूलों से संपर्क कर अपार आईडी जनरेशन का काम पूरा कराने में सहायता करेंगे। वे आने वाली समस्याओं का समाधान भी सुनिश्चित करेंगे। प्रत्येक सरकारी शिक्षक, एआरपी, एसआरजी एवं डीसी को चार-चार निजी स्कूलों में अपार आईडी का काम पूरा कराने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस संबंध में जल्द ही एक बैठक आयोजित की जाएगी। जिन स्कूलों में लापरवाही बरती जा रही है, उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा और काम पूरा न होने पर पोर्टल पर बंद भी दिखाया जा सकता है।
अपार आईडी विद्यार्थियों की एक डिजिटल पहचान है, जो उनके सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड जैसे अंक, पुरस्कार और उपलब्धियों को एक ही स्थान पर सुरक्षित रखती है। यह आधार से जुड़ी होती है और डिजिलाकर के साथ एकीकृत है। सभी स्कूलों के लिए सभी छात्रों की अपार आईडी बनाना अनिवार्य है। सितंबर 2024 में शुरू हुई इस पहल के बावजूद, दिसंबर 2025 की समय सीमा तक बड़ी संख्या में छात्र वंचित हैं, जिससे भविष्य में करियर संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। सरकारी स्कूलों में लगभग 95% काम पूरा हो चुका है, जबकि निजी स्कूल डेटा अपलोड करने और आईडी बनाने में लापरवाही कर रहे हैं।
