जमशेदपुर में बच्चों के दिल की बीमारी का चौंकाने वाला खुलासा, हर 5वां बच्चा जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित
जमशेदपुर में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर एक गंभीर चिंता सामने आई है। शहर में आयोजित एक नि:शुल्क हृदय जांच शिविर में यह खुलासा हुआ कि जांच किए गए बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की दर काफी अधिक है। शिविर में कुल 49 बच्चों की जांच की गई, जिनमें से 10 बच्चों में जन्मजात दिल की बीमारी की पुष्टि हुई। यह आंकड़ा स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अभिभावकों दोनों के लिए चेतावनी है, क्योंकि इसका मतलब है कि जांच किए गए लगभग हर पांचवें बच्चे को यह बीमारी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान न होने पर यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती थी। कई मामलों में बीमारी जन्म से ही मौजूद थी, लेकिन लक्षण स्पष्ट न होने के कारण अभिभावकों को इसकी जानकारी नहीं थी। यह शिविर ‘नन्हा सा दिल-जन्मजात हृदय रोग निवारण एवं उपचार कार्यक्रम’ के तहत आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य नवजात शिशुओं से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों की गहन जांच करना था।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिन 10 बच्चों में जन्मजात दिल की बीमारी की पुष्टि हुई है, उन्हें आगे के उपचार के लिए देश के उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजा जाएगा। इन संस्थानों में कोंडापाका (हैदराबाद), खारघर (नवी मुंबई), रायपुर (छत्तीसगढ़) और पलवल (हरियाणा) शामिल हैं। इन सभी बच्चों का इलाज पूरी तरह नि:शुल्क कराया जाएगा, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर कोई बोझ न पड़े।
चिकित्सकोंडापाका (हैदराबाद) और अन्य केंद्रों पर बच्चों को भेजने से पहले, स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों को बीमारी के लक्षणों के प्रति जागरूक किया है। चिकित्सकों ने बताया कि होंठ या त्वचा का नीला पड़ना, दूध पीते समय अधिक पसीना आना, बार-बार सर्दी या बुखार होना, वजन का ठीक से न बढ़ना, जल्दी थक जाना और सांस फूलना, ये सभी जन्मजात दिल की बीमारी के संकेत हो सकते हैं। इन लक्षणों को सामान्य कमजोरी मानकर अनदेखा करना बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने बताया कि जांच के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि समाज में जन्मजात हृदय रोग के कई मामले छिपे हुए हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों में किसी भी प्रकार का असामान्य लक्षण दिखे तो तुरंत जांच कराएं। समय पर पहचान और उपचार से बच्चों का जीवन पूरी तरह सामान्य बनाया जा सकता है।
