श्रम सुधार: आत्मनिर्भर भारत की ओर एक महत्वपूर्ण कदम
आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में भारत सरकार द्वारा लागू की गई नई श्रम संहिताएं एक युगांतरकारी परिवर्तन का संकेत दे रही हैं। ये संहिताएं न केवल श्रमिकों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करती हैं, बल्कि औद्योगिक विकास को भी गति प्रदान करती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के मूल मंत्र से प्रेरित ये सुधार एक आधुनिक, लचीली और समावेशी अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव रखने का काम करेंगे, जिसमें श्रमिक और उद्योग दोनों ही देश के विकास के केंद्र में होंगे।
कई दशकों तक भारत कमजोर आर्थिक विकास, भ्रष्टाचार और रोजगार सृजन एवं श्रमिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता के अभाव से जूझता रहा। राजनीतिक कारणों से होने वाले औद्योगिक गतिरोधों ने निवेश को रोका और व्यवस्था में विश्वास को कम किया। इस स्थिति को बदलने के लिए एक बड़े राष्ट्रीय सोच की आवश्यकता थी। लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ‘श्रमेव जयते’ का आह्वान इसी नई सोच का प्रतीक था, जिसने नीतियों के केंद्र में श्रमिकों के सम्मान को रखा।
भारत के अधिकांश श्रम कानून 1920 से 1950 के दशक के थे, जिनमें औपनिवेशिक मानसिकता की झलक थी। जबकि दुनिया में काम करने के तरीके तेजी से बदल रहे थे, गिग और प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था का उदय, डिजिटल कार्य, लचीली कार्य संरचनाएं और नए उद्यम उभर रहे थे। पुराने कानून इन आधुनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ थे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पंच प्रण के माध्यम से औपनिवेशिक मानसिकता को छोड़कर भविष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया। यह स्पष्ट था कि पुराने कानूनों को बदलने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और दूरदृष्टि की कमी थी।
इस राष्ट्रीय आवश्यकता को समझते हुए, मोदी सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को चार सरल और स्पष्ट संहिताओं में एकीकृत किया: वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता। 21 नवंबर से प्रभावी हुई ये संहिताएं एक आधुनिक श्रम ढांचा प्रस्तुत करती हैं, जो श्रमिक-हितैषी और विकास-समर्थक हैं। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की बदलती मांगों को पूरा करने के लिए भारत की तत्परता को दर्शाता है।
संचालित हितधारकों के साथ संवाद के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि कार्यस्थल पर स्पष्टता, निष्पक्षता और सम्मान श्रम संहिता का मूल होना चाहिए। इन सुधारों ने जटिल और बिखरे हुए पुराने तंत्र को एक सरल, पारदर्शी और हर श्रमिक की सुरक्षा करने वाले सिस्टम से बदल दिया है। ये संहिताएं नियोक्ताओं की अपेक्षाओं को संतुलित करते हुए श्रमिकों के हितों को प्राथमिकता देती हैं। ये निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देती हैं, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करती हैं, और ऑडियो-विजुअल, गिग और प्लेटफार्म श्रमिकों को औपचारिक मान्यता प्रदान करती हैं। सभी श्रमिकों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जांच, अनिवार्य नियुक्ति पत्र, पे स्लिप और सवेतन वार्षिक अवकाश जैसे प्रावधान श्रमिकों को अधिक स्थिरता, सम्मान और सुरक्षा प्रदान करते हैं।
इसके अतिरिक्त, संहिताओं में निश्चित अवधि के रोजगार (Fixed Term Employment – FTE) की शुरुआत की गई है, जो कांट्रैक्ट आधारित रोजगार का एक प्रगतिशील विकल्प है। FTE के तहत नियुक्त श्रमिकों को स्थायी कर्मचारियों के समान ही वेतन, लाभ और काम करने की स्थितियां प्राप्त होती हैं, जिनमें सवेतन अवकाश और काम के तय घंटे शामिल हैं।
