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श्रीमद्भगवद्गीता: सभी वैदिक साहित्य का सार, मोक्षदा एकादशी पर भव्य आयोजन

By Dec 1, 2025

मोक्षदा एकादशी के पावन अवसर पर केशव दुर्ग (कंस किला) में संस्कृत भारती द्वारा एक भव्य गीता जयंती समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वैदिक विधि-विधान के साथ हवन-पूजन, एक ज्ञानवर्धक विद्वत गोष्ठी और प्रतिष्ठित विद्वानों का सम्मान समारोह संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य मुरलीधर चतुर्वेदी के आचार्यत्व में श्रीमद्भगवद्गीता के पूजन के साथ हुआ।

कार्यक्रम में संस्कृत भारती के अध्यक्ष आचार्य ब्रजेन्द्र नागर, कार्यक्रम संयोजक योगेश उपाध्याय आवा, रामदास चतुर्वेदी, अखिलेश गौतम, मंत्री डॉ. संजय शर्मा, संदीप चौधरी, श्यामसुंदर शर्मा और गंगाधर अरोड़ा ने अतिथियों का स्मृति चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया। ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्याय और 700 श्लोकों के साथ यज्ञ का अनुष्ठान किया गया।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल आध्यात्मिक अनुभव का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में नैतिक और धार्मिक मूल्यों के संचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने गीता के ज्ञान को जीवन के हर क्षेत्र में प्रासंगिक बताया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गीताव्रती कैलाश अग्रवाल एवं प्रदीप अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि गीता ज्ञान का एक अथाह सागर है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से संपूर्ण मानव समाज को धर्म, कर्म और मोक्ष का शाश्वत ज्ञान प्रदान किया है। उन्होंने गीता को मानव जीवन के लिए एक अमूल्य मार्गदर्शक ग्रंथ बताया।

गोष्ठी में उद्योगपति डॉ. वीके चतुर्वेदी ‘विनोदम्’ ने श्रीमद्भगवद्गीता के सार पर विस्तार से प्रकाश डाला और इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि एवं संस्कृत भारती ब्रजप्रांत न्यास अध्यक्ष ओमप्रकाश बंसल ने श्रीमद्भगवद्गीता की महिमा का वर्णन करते हुए इसे सभी वेदों, पुराणों और उपनिषदों का सार बताया। उन्होंने इसके विश्वव्यापी महत्व को रेखांकित किया।

इस अवसर पर रस्वरुप यादव, गणेश शंकर पाण्डेय, राजेन्द्र दुवे, विजय बहादुर सिंह, पार्षद कुंजबिहारी भारद्वाज, मूलचंद गर्ग, डॉ. जमुना शर्मा, नीरज चतुर्वेदी, ऋषभ चतुर्वेदी, तरुण नागर, मीनाक्षी नागर, पुष्पेन्द्र, शिवा, किशोरी यादव सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने श्रीमद्भगवद्गीता को एक अद्भुत और विश्वव्यापी धर्मग्रंथ बताया। वक्ताओं ने यह भी जानकारी दी कि गीता का अनुवाद वर्तमान में 578 भाषाओं में हो चुका है और विश्व के अनेक देशों में इसका अध्ययन व शोधकार्य किया जा रहा है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कार्यक्रम संयोजक योगेश उपाध्याय आवा एवं अखिलेश गौतम ने 108 श्रीमद्भगवद्गीता पुस्तकों का वितरण भी किया। कार्यक्रम का सफल संचालन संस्कृत भारती के मंत्री डॉ. संजय शर्मा ने किया।

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