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शीतकालीन सत्र में पेश होगा सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल 2025, निवेशकों को मिलेगी नई सुरक्षा

By Nov 22, 2025

सरकार संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल, 2025 पेश करने की योजना बना रही है। यह महत्वपूर्ण विधेयक देश के वित्तीय बाजारों को सुव्यवस्थित करने और निवेशकों के हितों की रक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी एक बुलेटिन के अनुसार, यह बिल 1 दिसंबर से शुरू होने वाले सत्र के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा।

इस प्रस्तावित कानून का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह भारत के वित्तीय बाजारों को नियंत्रित करने वाले कई मौजूदा कानूनों को एक एकीकृत (यूनिफाइड) कोड में समाहित करेगा। इसमें मुख्य रूप से सेबी एक्ट (1992), डिपोजिटरी एक्ट (1996), और सिक्योरिटी कॉन्ट्रैक्ट (रेगुलेशन) एक्ट (1956) जैसे प्रमुख अधिनियम शामिल होंगे। इन विभिन्न कानूनों को एक छत के नीचे लाने से नियमों के बीच टकराव की संभावना कम होगी और अनुपालन (कॉम्प्लायंस) की प्रक्रियाएं सरल हो जाएंगी।

यह विचार पहली बार केंद्रीय बजट 2021-22 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने इन कानूनों के साथ गवर्नमेंट सिक्योरिटी एक्ट, 2007 को भी मिलाकर एक “रैशनलाइज्ड सिक्योरिटीज मार्केट कोड” बनाने का प्रस्ताव दिया था। वर्तमान में, भारत के पूंजी बाजार कई नियामक संस्थाओं और विभिन्न कानूनों द्वारा शासित होते हैं, जिससे कभी-कभी जटिलताएं और अनुपालन का बोझ बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक एकीकृत कोड से कंपनियों के लिए अनुपालन लागत में कमी आएगी। साथ ही, विभिन्न नियमों के बीच होने वाले टकराव (फ्रिक्शन) में कमी आएगी, जिससे बाजार की कार्यप्रणाली अधिक सुचारू होगी। इससे निवेशकों और बाजार से जुड़ी अन्य संस्थाओं के लिए प्रक्रियाएं भी कहीं अधिक आसान हो जाएंगी।

इस बिल में गवर्नमेंट सिक्योरिटी एक्ट, 2007 को भी शामिल किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे सरकार की उधारी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और विश्वसनीयता आएगी। विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है, जिससे सरकारी बॉन्ड मार्केट को भी महत्वपूर्ण मजबूती मिलेगी।

यह विधेयक भारत के प्रतिभूति बाजार में “एक देश, एक कोड” जैसी व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह विधेयक संसद में पारित हो जाता है, तो यह न केवल बाजार की परिचालन दक्षता में सुधार करेगा, बल्कि निवेशकों के लिए एक अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित निवेश वातावरण भी तैयार करेगा, जिससे उनके अनुभव में काफी सुधार होगा।

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