शिमला में 19,832 बाहरी श्रमिक पंजीकृत, उत्तर प्रदेश और नेपाल के मजदूर सबसे अधिक
शिमला जिला में विभिन्न कार्यों में लगे अन्य राज्यों के श्रमिकों की संख्या हजारों में है, जिनकी कुल संख्या 19,832 दर्ज की गई है। श्रम विभाग द्वारा किए गए इस व्यापक पंजीकरण का मुख्य उद्देश्य इन श्रमिकों के कल्याण और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। इस पहल से सरकार को भविष्य में इन श्रमिकों के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंजीकृत श्रमिकों में से 19,602 लोग विभिन्न प्रकार की मजदूरी के कार्यों में लगे हुए हैं, जबकि 230 श्रमिक घरेलू नौकर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन बाहरी श्रमिकों में सबसे बड़ी संख्या नेपाल के नागरिकों की है, जो मुख्य रूप से ऊपरी शिमला क्षेत्र में सेब के बगीचों में काम करते हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों का स्थान आता है, जो मुख्य रूप से भवन निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में संलग्न हैं। झारखंड के श्रमिक फोरलेन और सड़क निर्माण जैसे अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में मजदूरी करते हुए पाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, कश्मीरी श्रमिक शिमला शहर में सामान ढोने जैसे कार्यों से जुड़े हुए हैं।
यह पंजीकरण प्रक्रिया पिछले वर्ष से उठाए जा रहे सवालों के बाद शुरू की गई थी, जब शिमला में बाहरी राज्यों से आने वाले मजदूरों की संख्या को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही थीं। पुलिस ने इन मजदूरों के पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया को गंभीरता से लिया ताकि उनकी पहचान सुनिश्चित की जा सके और सुरक्षा मानकों का पालन हो सके।
श्रमिकों के पंजीकरण के साथ-साथ, शिमला नगर निगम ने शहर में तहबाजारी (खुले में सामान बेचने वाले) का पंजीकरण भी जारी रखा है। नगर निगम को प्राप्त आवेदनों के आधार पर पुलिस को इनका सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, निर्धारित आठ दस्तावेजों में से अधिकांश तहबाजारियों के दस्तावेज पूरे न होने के कारण यह प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है। अब तक कुल हजार आवेदकों में से मात्र 16 तहबाजारियों का ही सफलतापूर्वक पंजीकरण हो पाया है।
