शेयर बाजार ने रचा इतिहास, क्या आज दिखेगी गिरावट?
भारतीय शेयर बाजार ने 27 नवंबर को एक नया इतिहास रचते हुए अपने पिछले रिकॉर्ड को पार कर लिया। बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ने नई ऊंचाइयों को छुआ, जो निवेशकों के लिए उत्साहजनक रहा। यह तेजी फेडरल रिजर्व और भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी नीतिगत बैठकों में ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीदों और रूस-यूक्रेन के बीच शांति वार्ता की प्रगति से प्रेरित थी।
सेंसेक्स जहां 86,055.86 के शिखर पर पहुंचा, वहीं निफ्टी 50 ने 26,310.45 का नया कीर्तिमान स्थापित किया। हालांकि, दिन के कारोबार के दूसरे भाग में मुनाफावसूली हावी हो गई, जिससे बाजार की अधिकांश बढ़त समाप्त हो गई। अंततः, सेंसेक्स 110.87 अंक या 0.13 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 85,720.38 पर और निफ्टी 10.25 अंक या 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 26,215.55 पर बंद हुआ।
भले ही भारतीय बाजार ने रिकॉर्ड बनाया हो, लेकिन वैश्विक संकेत मिले-जुले रहे। एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई, जो पिछले सप्ताह की तेजी के बाद एक संभावित ठहराव का संकेत दे रहा है। वहीं, अमेरिकी डॉलर जुलाई के अंत के बाद से अपने सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा था, जिसका कारण फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में मौद्रिक ढील की उम्मीदें हैं।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, ब्रेंट क्रूड ऑयल वायदा में शुक्रवार को कोई खास बदलाव नहीं हुआ। निवेशकों की निगाहें रूस-यूक्रेन शांति वार्ता की प्रगति और ओपेक+ बैठक के परिणामों पर टिकी थीं, जो तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं। ब्रेंट क्रूड का अग्रिम माह का वायदा 63.34 डॉलर प्रति बैरल पर अपरिवर्तित रहा, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड में थोड़ी बढ़त देखी गई।
गिफ्ट निफ्टी के रुझानों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार के लिए एक सपाट शुरुआत का अनुमान है, जिसमें लगभग 5 अंकों की मामूली बढ़त देखी जा सकती है। यह स्थिति दर्शाती है कि बाजार के निवेशक फिलहाल किसी बड़े कदम से पहले सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। आगे चलकर, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियां और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
