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शेयर बाजार में तेजी, पर आम निवेशक बेच रहे शेयर

By Dec 2, 2025

भारतीय शेयर बाजार में अक्टूबर से लगातार तेजी का रुख बना हुआ है, और निफ्टी ने हाल ही में 26,000 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर दिसंबर में 26,325 का नया रिकॉर्ड स्तर छुआ है। हैरानी की बात यह है कि बाजार की इस शानदार चाल के बावजूद, आम निवेशक इससे दूर नजर आ रहे हैं। राष्ट्रीय शेयर बाजार (NSE) के आंकड़ों के अनुसार, खुदरा निवेशकों ने अक्टूबर और नवंबर के महीनों में कुल 25,300 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेच दिए हैं।

आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर में खुदरा निवेशकों ने लगभग 13,776 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि नवंबर में यह आंकड़ा 11,544 करोड़ रुपये रहा। यह बिकवाली तब हुई जब बाजार का सेंटिमेंट सुधर रहा था और सेंसेक्स व निफ्टी में क्रमशः 4 प्रतिशत से अधिक और 2 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि साल की शुरुआत से ही छोटे और खुदरा निवेशकों को बाजार में काफी अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि हाल के महीनों में बाजार में सुधार दिखा है, लेकिन कई छोटे निवेशकों ने इस अवसर का फायदा उठाकर मुनाफावसूली की है।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीणा के अनुसार, सोने और चांदी में आई जबरदस्त तेजी के कारण निवेशक शेयर बाजार से दूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इक्विटी पोर्टफोलियो में कटौती तो हो रही है, लेकिन बाजार पर भरोसा अभी भी बना हुआ है, क्योंकि एसआईपी (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के माध्यम से निवेश का प्रवाह स्थिर है। हालांकि, निवेशक अब एकमुश्त पैसा सीधे शेयरों में लगाने के बजाय मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स में लगाना पसंद कर रहे हैं, जो विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में निवेश का एक विविधीकृत तरीका है।

इस साल सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। सोने की कीमत में अब तक 61 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि चांदी 96 प्रतिशत से अधिक चढ़ी है। ऐसे में, जब शेयर बाजार के कुछ हिस्से अस्थिर और असमान बने हुए हैं, तो सोने-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में बेहतर रिटर्न मिल रहा है।

यह भी गौर करने वाली बात है कि इस साल खुदरा निवेशकों की भागीदारी सुस्त रही है। साल के अधिकांश समय में छोटे निवेशक शुद्ध बिकवाली करते रहे। इस साल सिर्फ चार महीनों – जनवरी, फरवरी, जुलाई और अगस्त में ही उन्होंने खरीदारी की, जबकि बाकी समय में लगातार बिकवाली का दौर जारी रहा। इसके विपरीत, 2024 में खुदरा निवेशकों ने सामूहिक रूप से 1.66 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था।

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