भारतीय क्रिकेट पर ‘हार’ का साया! क्या ये 3 धुरंधर बनेंगे गौतम गंभीर की ‘गंभीर’ समस्या का हल?
भारतीय क्रिकेट टीम के लिए एक और घरेलू टेस्ट सीरीज में हार का सामना करना पड़ा है, जिसने प्रशंसकों को निराश किया है। 26 नवंबर को गुवाहाटी में साउथ अफ्रीका ने जीत दर्ज कर भारत के खिलाफ क्लीन स्वीप किया। यह एक साल के भीतर घरेलू मैदान पर उसकी दूसरी टेस्ट सीरीज हार थी, जिसने भारतीय टीम के खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस लगातार हार ने भारतीय टेस्ट टीम में बदलाव की मांग को तेज कर दिया है। साथ ही हेड कोच गौतम गंभीर को हटाने की बात भी कही जा रही थी। हालांकि, इसको लेकर बीसीसीआई ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि हेड कोच को बदलने का अभी कोई इरादा नहीं है और गंभीर तीनों प्रारूप में कोच बने रहेंगे।
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल की उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए भारत को अब अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। मौजूदा टीम में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की सख्त जरूरत है। साथ ही सभी विभागों में सुधार और अनुभव व स्थिरता को मजबूत करने के लिए कुछ योग्य खिलाड़ियों की टेस्ट टीम में वापसी जरूरी है। तीन ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनकी वापसी टीम के लिए संजीवनी साबित हो सकती है।
अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी 64 टेस्ट मैचों में 229 विकेट लेकर भारत के सर्वश्रेष्ठ टेस्ट गेंदबाजों में से एक हैं। हालांकि, चोटों और फिटनेस संबंधी चिंताओं के कारण वह टीम से बाहर चल रहे हैं। शमी ने हाल ही में 2025-26 रणजी ट्रॉफी में चार मैचों में 20 विकेट लेकर शानदार वापसी की है, जिसमें उन्होंने गेंदबाजी में बेजोड़ नियंत्रण दिखाया। किसी भी परिस्थिति में स्ट्राइक करने की उनकी क्षमता उन्हें अमूल्य खिलाड़ी बनाती है और उनकी वापसी भारत के तेज गेंदबाजी आक्रमण को मजबूत कर सकती है, जिसमें हाल के महीनों में अनुभव और निरंतरता की कमी देखी गई है।
मध्य प्रदेश के बल्लेबाज रजत पाटीदार टेस्ट टीम में वापसी के सबसे योग्य उम्मीदवारों में से एक हैं। हालांकि, उन्होंने भारत के लिए केवल तीन टेस्ट मैच खेले हैं, लेकिन उनका घरेलू रिकॉर्ड एक दिलचस्प कहानी बयां करता है। पाटीदार ने सेंट्रल जोन को दलीप ट्रॉफी का खिताब दिलाया है, जहां उन्होंने टूर्नामेंट के दौरान दो शतक और दो अर्धशतक लगाए। उन्होंने ईरानी कप में एक अर्धशतक और रणजी ट्रॉफी में पंजाब के खिलाफ दोहरा शतक भी जड़ा, जिससे उनकी दृढ़ता का परिचय मिलता है। उनकी मजबूत तकनीक उन्हें भारत के मध्यक्रम को मजबूत करने का एक प्रबल दावेदार बनाती है।
ऋतुराज गायकवाड़ घरेलू क्रिकेट में रनों की मशीन बने हुए थे। पिछली आठ पारियों में 514 रन, औसत 85.66, जो किसी भी चयनकर्ता को सोचने पर मजबूर कर दे। ऋतुराज गायकवाड़ ने साउथ अफ्रीका-ए के खिलाफ तीन पारियों में 201 रन ठोके। उन्हें वनडे टीम में जगह दी गई है, हालांकि वह टेस्ट के भी दमदार खिलाड़ी हैं। रणजी ट्रॉफी में उन्होंने महाराष्ट्र के लिए खेलते हुए कई शतक और अर्धशतक जड़े हैं, जो उनकी काबिलियत का प्रमाण है।
