सुपौल में 132 पंचायत रोजगार सेवकों का हुआ तबादला, 8 दिसंबर तक योगदान का निर्देश
सुपौल जिले में मनरेगा योजना के सुचारू संचालन और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ाने के उद्देश्य से 132 पंचायत रोजगार सेवकों का स्थानांतरण किया गया है। यह महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय जिलाधिकारी सह जिला कार्यक्रम समन्वयक द्वारा लिया गया है, जिसके तहत उन सभी सेवकों को नई जगह पदस्थापित किया गया है जिनकी सेवा अवधि तीन वर्ष या उससे अधिक हो चुकी थी।
इस स्थानांतरण प्रक्रिया के तहत, कुल 132 पंचायत रोजगार सेवकों के कार्य-क्षेत्र का पुनर्विन्यास करते हुए उन्हें प्रखंड से लेकर पंचायत स्तर तक नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जिला स्तर से जारी आदेश में सभी स्थानांतरित सेवकों के वर्तमान और नव पदस्थापित प्रखंडों व पंचायतों का विस्तृत विवरण अंकित है।
सभी संबंधित पंचायत रोजगार सेवकों को यह निर्देश दिया गया है कि वे 8 दिसंबर 2025 तक अपने नव पदस्थापित स्थान पर योगदान सुनिश्चित करें। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर योगदान न करने वाले सेवकों को 10 दिसंबर 2025 के उपरांत अनुपस्थित माना जाएगा और उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
जिन पंचायतों में किसी कारणवश पंचायत रोजगार सेवक का पदस्थापन जिला स्तर से नहीं हो पाया है, उन्हें खाली नहीं छोड़ा जाएगा। ऐसे मामलों में, संबंधित प्रखंड के मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी निकटतम पंचायत के पंचायत रोजगार सेवक को अतिरिक्त प्रभार देने के लिए प्रस्ताव तैयार कर जिला को भेजेंगे, ताकि योजनाओं के कार्यान्वयन में कोई बाधा न आए।
प्रशासन का मानना है कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता में वृद्धि और कार्यों में निष्पक्षता लाने के लिए समय-समय पर इस प्रकार के स्थानांतरण आवश्यक हैं। इस निर्णय से विभिन्न पंचायतों में योजना क्रियान्वयन की गति और निगरानी प्रणाली को मजबूती मिलने की अपेक्षा है। प्रशासन ने सभी सेवकों से समय पर योगदान देकर मनरेगा योजनाओं की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
