सुलतानपुर में आवारा कुत्तों का आतंक, 8 महीनों में 9000 से अधिक लोग बने शिकार
सुलतानपुर जिले में आवारा कुत्तों का आतंक भयावह रूप ले चुका है। पिछले वर्ष जहां दस हजार से अधिक लोग कुत्तों के काटने से घायल हुए थे, वहीं इस वर्ष अप्रैल से नवंबर माह के बीच नौ हजार से अधिक लोग इसका शिकार बन चुके हैं। इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर, मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रतिदिन एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने वालों की भीड़ देखी जा रही है। अस्पताल में हर दिन औसतन 40 से 50 लोगों को एआरवी का टीका लगाया जा रहा है।
रेबीज से बचाव के लिए लगाए जाने वाले एआरवी के चार डोज होते हैं। पीड़ितों को पहले, तीसरे, सातवें, 14वें और 28वें दिन इंजेक्शन लगवाने के लिए अस्पताल बुलाया जाता है। पहले जहां 14 इंजेक्शन लगाए जाते थे, वहीं अब इनकी संख्या कम कर दी गई है। एक वायल से चार पीड़ितों को टीका लगाया जा रहा है, जिससे वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
गोसाईंगंज के नईम, जिन्हें गांव में एक आवारा कुत्ते ने बीच-बचाव के दौरान काट लिया था, वे एआरवी की चौथी डोज लगवाने मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। इसी तरह, कटका के शिवम भी दूसरा डोज लेने आए थे। इनके अलावा राकेश, धीरज, प्रसून, करीना जैसे कई अन्य लोग भी एआरवी लगवाने अस्पताल में मौजूद थे, जिन्हें नर्सिंग स्टाफ ने टीका लगाया।
पीड़ितों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गांव से लेकर शहर की गलियों तक आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए कोई प्रभावी उपाय नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल इस दिशा में व्यवस्था करने की अपील की है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में एआरवी की पर्याप्त डोज उपलब्ध हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि कोई भी पीड़ित रविवार को छोड़कर निर्धारित समय पर भूतल पर स्थित कक्ष संख्या 22 में आकर इंजेक्शन लगवा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रबंध किए गए हैं।
