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सुकमा में 48 लाख के इनामी सहित 15 नक्सलियों ने छोड़े हथियार, मुख्यधारा में वापसी

By Nov 25, 2025

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से माओवादी संगठन के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां सोमवार शाम को 48 लाख रुपये के इनामी माओवादियों सहित कुल 15 नक्सलियों ने पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। यह आत्मसमर्पण सुकमा जिला मुख्यालय स्थित माओवादी सेल कार्यालय में हुआ।

समर्पण करने वालों में कई ऐसे नक्सली शामिल हैं जिन पर भारी इनाम घोषित था। इनमें आठ-आठ लाख रुपये के इनामी माड़वी सन्ना, सोड़ी हिड़मे, सुर्यम उर्फ रव्वा, और मीना उर्फ माड़वी भीमे शामिल हैं। इसके अलावा पांच-पांच लाख के इनामी सुनिता उर्फ कुहराम, मड़कम पांडू पामेड़, तीन लाख के इनामी कुंजाम सिंगा गोलापल्ली, दो लाख के इनामी माड़वी सोमड़ी गोमपाड़ और एक लाख के इनामी चिलका उर्फ माड़वी पोज्जे भी शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में नुप्पो बुधरा, नुप्पो भीमा, मड़कम सुक्का, पोडि़यम जोगा, पोडि़यम लखमा, और कोवासी हिड़मा जैसे अन्य नक्सली भी थे, जिनमें से कुछ कुख्यात नक्सली हिड़मा के करीबी साथी बताए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, इन नक्सलियों ने पहले संगठन के भीतर समर्पण की अनुमति मांगी और फिर अपने हथियार जमा कराए। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क कर मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया पूरी की। पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि सभी समर्पित नक्सलियों को नियमानुसार प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। यह आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों और माओवादी कैडरों पर बढ़ते दबाव का परिणाम माना जा रहा है।

इस बीच, माओवादी प्रवक्ता अनंत के नाम से जारी एक कथित पत्र में संगठन ने हथियार छोड़ने और मुख्यधारा में लौटने के लिए 15 फरवरी 2026 तक का समय मांगा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि इस अवधि के दौरान सुरक्षा बलों को अपनी कार्रवाई रोकनी चाहिए, ताकि वे सामूहिक रूप से हिंसक गतिविधियों को त्यागने का निर्णय ले सकें। हालांकि, पुलिस अधिकारी इस पत्र की सत्यता की जांच कर रहे हैं और इसे एक चाल के रूप में भी देख रहे हैं।

हाल के दिनों में, सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के चलते कई माओवादी सदस्य हथियार डाल रहे हैं। इससे पहले भी तेलंगाना जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें शीर्ष नेता भी शामिल थे। सुकमा में हुआ यह आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के लिए एक और बड़ा झटका है।

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