सरकारी संस्थानों से हटेंगे आवारा कुत्ते: नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कसी कमर
सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण आदेश के अनुपालन में, नगर निगम अब सरकारी संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने की कवायद में जुट गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सरकारी परिसरों में आने वाले लोगों को कुत्तों के कारण होने वाली असुविधा और संभावित खतरों से बचाना है। इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए, नगर निगम ने विभिन्न सरकारी संस्थानों से अपने यहां मौजूद आवारा कुत्तों की संख्या की जानकारी मांगी है। इससे निगम को आवश्यक संसाधनों का आकलन करने और तदनुसार कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
सूत्रों के अनुसार, शहर में वर्तमान में लगभग 1.10 लाख आवारा कुत्ते हैं। इन कुत्तों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने और उनकी आबादी को नियंत्रित करने के लिए टीकाकरण और नसबंदी जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों के लिए भोजन केंद्र स्थापित करने का भी उल्लेख है, लेकिन इस दिशा में प्रगति धीमी है। कई वार्डों में अभी तक ऐसे केंद्र स्थापित नहीं हो पाए हैं, जिसका एक प्रमुख कारण स्थानीय लोगों का विरोध बताया जा रहा है।
सरकारी संस्थानों से कुत्तों को हटाने की योजना के साथ ही, उन्हें रखने के लिए एक स्थायी समाधान की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है। छत्ता जोन में सरकारी भूमि पर एक शेल्टर होम बनाने की योजना पर काम चल रहा है, लेकिन वर्तमान में यह योजना केवल कागजी स्तर पर ही सीमित है। जब तक यह शेल्टर होम हकीकत का रूप नहीं ले लेता, तब तक हटाए गए कुत्तों को कहां रखा जाएगा, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। पशु कल्याण अधिकारी, डॉ. अजय कुमार ने बताया कि सार्वजनिक संस्थानों को पत्र भेजकर कुत्तों की संख्या की जानकारी मांगी गई है। एसएन मेडिकल कॉलेज, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, जिला अस्पताल, केंद्रीय हिंदी संस्थान, रेलवे स्टेशन, परिवहन निगम, सिंचाई विभाग, माध्यमिक शिक्षा एवं बेसिक शिक्षा विभाग सहित अन्य कई प्रमुख संस्थानों से इस संबंध में जानकारी एकत्र की जा रही है।
