सर्दियों में बार-बार जुकाम? आयुर्वेद विशेषज्ञ ने बताए 15 बड़े सवालों के जवाब
सर्दियों का मौसम जहाँ अपने साथ कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजनों की सौगात लेकर आता है, वहीं यह मौसमी बीमारियों को भी न्योता देता है। इस मौसम में खान-पान का हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि इस ऋतु में पाचन शक्ति मजबूत होती है, इसलिए पौष्टिक आहार का सेवन करना विशेष रूप से लाभदायक होता है। दैनिक जागरण कार्यालय में आयोजित ‘हेलो डॉक्टर’ कार्यक्रम में राजभवन के पूर्व वरिष्ठ चिकित्साधिकारी एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. शिव शंकर त्रिपाठी ने पाठकों के सवालों के जवाब देते हुए सर्दियों से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि सर्दियों में अग्नि प्रबलता रहती है, इसलिए हमें अपने आहार में दूध, घी, मलाई, रबड़ी, तेल, छेना और नए चावल जैसी पौष्टिक चीजों को उचित मात्रा में शामिल करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ाने के लिए कुछ अचूक उपाय बताए। हल्दी, मेथी, अश्वगंधा, सोंठ और अजवाइन (भुनी हुई) को बराबर मात्रा में मिलाकर उसका चूर्ण बनाकर सुबह-शाम एक-एक चम्मच सेवन करने की सलाह दी। इसके अतिरिक्त, आंवला-लहसुन की चटनी और अदरक के साथ तुलसी, काली मिर्च व दालचीनी का काढ़ा पीने से खांसी-जुकाम से बचाव होता है।
कार्यक्रम के दौरान, कई पाठकों ने अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को साझा किया और विशेषज्ञ से परामर्श लिया। 86 वर्षीय बीएन वैश्य को बलगम की समस्या थी, जिसके लिए डॉ. त्रिपाठी ने पुष्करमूल चूर्ण, काकड़ाशृंगी, हल्दी व मुलेठी का मिश्रण दूध में मिलाकर सेवन करने का सुझाव दिया। 80 वर्षीय सतीश मिश्र, जो सांस की दिक्कत और कफ से परेशान थे, उन्हें अडूसा, अदरक, काली मिर्च व दालचीनी का काढ़ा पीने और भाप लेने की सलाह दी गई, साथ ही चावल, दही और ठंडे पानी से परहेज करने को कहा गया। 60 वर्षीय सतीश द्विवेदी, जिन्हें पेसमेकर लगा है और शुगर भी है, उन्हें मेथी के पानी का सेवन और प्रतिदिन धूप निकलने के बाद 40 मिनट टहलने की सलाह दी गई।
इसके अलावा, 65 वर्षीय नरेंद्र श्रीवास्तव को कब्ज और फिस्टुला की समस्या थी, जिसके लिए उन्होंने छिल्केदार सब्जी और मोटे अनाज खाने, कच्चे पपीते की सब्जी का सेवन करने और विशिष्ट आयुर्वेदिक औषधियों के प्रयोग की सलाह दी। 50 वर्षीय संदीप कौर, जिन्हें जुकाम जल्दी ठीक नहीं होता और सिर दर्द रहता है, उन्हें हल्दी-मुलेठी वाला दूध और चित्रक हरीतकी अवलेह लेने का सुझाव दिया गया। आठ वर्षीय बच्चे के बार-बार जुकाम होने पर बालचातुर्भद्र चूर्ण, सितोपलादि चूर्ण आदि का शहद के साथ सेवन करने की सलाह दी गई। 40 वर्षीय सुधीर श्रीवास्तव ने कोलेस्ट्रॉल कम करने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आंवला-अदरक और मेथी के सेवन के साथ गुड़ के प्रयोग की बात कही। 45 वर्षीय मुकेश श्रीवास्तव, जिन्हें जुकाम और पैर दर्द की शिकायत थी, उन्हें महायोगराज गुग्गुल और चंद्रप्रभावटी की गोली के साथ मेथी चूर्ण लेने को कहा गया। 70 वर्षीय पारसनाथ तिवारी को अक्सर खांसी आती थी, उन्हें अदरक-तुलसी का काढ़ा और आंवला-लहसुन की चटनी के सेवन की सलाह दी गई। 48 वर्षीय सुरेंद्र को सर्दी-जुकाम बना रहता था, उन्हें अणु तेल नाक में डालने और त्रिभुवन कीर्तिरस व चित्रक हरीतकी अवलेह लेने का सुझाव दिया गया। 79 वर्षीय भारती ने इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए अश्वगंधा, मेथी, सोंठ, हल्दी और भुनी अजवाइन के मिश्रण का सेवन करने का तरीका पूछा। 66 वर्षीय लाल बहादुर को खांसी और जुकाम रहता था, उन्हें वासा अवलेह और हल्दी-अदरक वाला दूध पीने की सलाह दी गई, साथ ही चावल, दही, ठंडा पानी, राजमा और घुइया से परहेज करने को कहा गया। 12 वर्षीय आयुष्मान को अक्सर खांसी आती थी, उन्हें डीकाफ्सिन, एक्सट्राएम्यून और अणु तेल का प्रयोग करने को कहा गया। 72 वर्षीय राज बहादुर, जिन्हें अस्थमा और बलगम की समस्या थी, उन्हें इन्हेलर के साथ पुष्कराज…
