सोशल मीडिया पर बेलगाम आजादी पर लगेगी लगाम, सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्र नियामक की मांग
डिजिटल दुनिया में सोशल मीडिया एक शक्तिशाली मंच बनकर उभरा है, जिसने आम लोगों को अपनी आवाज उठाने का अवसर दिया है। हालांकि, इसके सकारात्मक पहलुओं के साथ-साथ नकारात्मक पहलू भी चिंताजनक रूप से बढ़े हैं। इंटरनेट पर अश्लील, भ्रामक और अवैध सामग्री की भरमार ने समाज में कई तरह की विसंगतियां पैदा की हैं। ऐसी सामग्री, खासकर यदि किसी व्यक्ति विशेष से जुड़ी हो, तो कुछ ही घंटों में व्यापक नुकसान पहुंचा सकती है, और पीड़ित के पास इससे निपटने के सीमित विकल्प होते हैं।
इस गंभीर स्थिति को संज्ञान में लेते हुए, उच्चतम न्यायालय ने सरकार से इंटरनेट मीडिया पर अवैध सामग्री को नियंत्रित करने के लिए एक स्वतंत्र नियामक निकाय स्थापित करने का आग्रह किया है। यह कदम सूचना के अनियंत्रित प्रवाह को रोकने और समाज को इसके दुष्परिणामों से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हो सकती है।
दुनिया भर के कई देशों ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए विभिन्न प्रकार के नियम और कानून लागू किए हैं। चीन, मिस्र, ईरान, उत्तर कोरिया, सऊदी अरब, सीरिया और भारत जैसे देशों में इंटरनेट मीडिया पर पहले से ही कड़े प्रतिबंध हैं। ये प्रतिबंध अक्सर अस्थायी होते हैं, जैसे चुनाव या विरोध प्रदर्शन के दौरान, या फिर स्थायी कानून के रूप में लागू किए जाते हैं। इन उपायों का मुख्य उद्देश्य सूचना के प्रवाह पर नियंत्रण रखना और फेक न्यूज को रोकना है, लेकिन कई बार इनका इस्तेमाल असहमति को दबाने के लिए भी किया जाता है।
हाल ही में, ब्राजील ने 2024 में एक्स (पूर्व में ट्विटर) को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया, क्योंकि कंपनी देश के एंटी-डिसइंफॉर्मेशन कानूनों का पालन नहीं कर रही थी। सरकार का मानना है कि टेक कंपनियों को चुनावों और स्वास्थ्य संबंधी फेक न्यूज के प्रसार को रोकने के लिए अधिक सख्त कदम उठाने चाहिए।
भारत ने भी 2020 में टिकटॉक सहित कई चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया था। सरकार ने डेटा गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा था कि इन ऐप्स के माध्यम से संवेदनशील जानकारी विदेशी संस्थाओं तक पहुंच सकती है। इस प्रतिबंध ने लाखों उपयोगकर्ताओं को अचानक अपने पसंदीदा प्लेटफार्मों से काट दिया था।
चीन में, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्म पूरी तरह से ब्लॉक हैं। चीनी नागरिक वीचैट और वीबो जैसे घरेलू प्लेटफार्मों का उपयोग करते हैं, जिन पर सरकार की कड़ी निगरानी रहती है। उत्तर कोरिया में इंटरनेट मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध है, और आम नागरिक केवल ‘क्वांगमयोंग’ नामक सरकारी इंट्रानेट तक ही सीमित हैं। विदेशी प्लेटफार्मों का उपयोग एक गंभीर अपराध माना जाता है, जिसके लिए सख्त सजा का प्रावधान है। ईरान में भी फेसबुक, एक्स और यूट्यूब जैसे प्लेटफार्म अवरुद्ध हैं, और लोग वीपीएन का उपयोग करके इन तक पहुंचने का प्रयास करते हैं, जो कानूनी जोखिमों से भरा है।
