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सोनीपत में प्रदूषण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 400 फैक्ट्रियों की जांच में 30 में मिली गंभीर खामियां

By Nov 21, 2025

सोनीपत जिले में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने शुक्रवार को एक व्यापक अभियान चलाया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की 20 संयुक्त टीमों ने उपायुक्त सुशील सारवान और पुलिस उपायुक्त नरेंद्र कादियान के नेतृत्व में चार एसडीएम और 55 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर करीब 400 औद्योगिक इकाइयों का सघन निरीक्षण किया। इस अभियान के दौरान 25 से 30 बड़ी फैक्ट्रियों में प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित गंभीर खामियां पाई गईं।

सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों और कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) द्वारा लागू ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप-3) के तहत यह कार्रवाई की गई। सुबह 7:30 बजे राई रेस्ट हाउस में सभी अधिकारियों को एकत्रित कर उपायुक्त ने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और तत्काल कार्रवाई के लिए रवाना किया। टीमों ने औद्योगिक क्षेत्रों में दाखिल होते ही फैक्ट्रियों में हलचल तेज हो गई, जहां कई उद्योग संचालक आवश्यक दस्तावेज जुटाने में लगे रहे, वहीं कुछ इकाइयों में अचानक निरीक्षण से हड़कंप मच गया।

निरीक्षण के दौरान, टीमों ने प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों (जैसे स्क्रबर, फिल्टर) की कार्यप्रणाली, स्वच्छ ईंधन (जैसे पीएनजी, सीएनजी) के उपयोग, उत्सर्जन मानकों का पालन, अपशिष्ट प्रबंधन, निर्माणाधीन परियोजनाओं और धूल नियंत्रण उपायों का बारीकी से निरीक्षण किया। अपशिष्ट जल और ठोस कचरा प्रबंधन के साथ-साथ धूल नियंत्रण के लिए कवरिंग और जल छिड़काव की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया गया। जहां भी अनियमितताएं पाई गईं, उनकी विस्तृत रिपोर्ट सीएक्यूएम को भेजी जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, वायु गुणवत्ता अत्यंत खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है, ऐसे में प्रदूषण फैलाने वाली या निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाली किसी भी औद्योगिक इकाई को बख्शा नहीं जाएगा। जिन इकाइयों में खामियां मिली हैं, उन पर सीलिंग, बिजली कनेक्शन काटने या जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। सोनीपत, राई, बड़ी, कुंडली, मुरथल, गन्नौर, नाथूपुर-सबौली, खरखौदा, बहालगढ़ और गोहाना रोड के औद्योगिक इलाकों में सुबह शुरू हुआ यह अभियान देर शाम तक जारी रहा।

राई रेस्ट हाउस को एक अस्थायी कंट्रोल रूम बनाया गया था, जहां से उपायुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी जीपीएस ट्रैकिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पल-पल की जानकारी लेते रहे। विशेष रूप से उन औद्योगिक इकाइयों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिन पर प्रदूषण फैलाने का संदेह था या जो ग्रैप-3 के मानकों का उल्लंघन कर रही थीं। इसमें गैर-साफ ईंधन (कोयला, फर्नेस ऑयल) के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध की पालना सुनिश्चित की गई और एमिशन टेस्टिंग व एक्यूआई प्रभाव का मूल्यांकन भी किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में वायु प्रदूषण को प्रभावी ढंग से कम करना है, ताकि नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।

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