संचार साथी एप विवाद: निजता पर हमले का आरोप या साइबर सुरक्षा का नया कदम?
दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा सभी नए मोबाइल फोन में ‘संचार साथी’ नामक साइबर सुरक्षा एप को प्री-इंस्टॉल (पहले से डाउनलोड) करने के आदेश ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस कदम को लोगों की निजता पर सीधा हमला करार देते हुए कहा कि सरकार हर नागरिक की निगरानी करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल फोन टैपिंग का मामला नहीं है, बल्कि सरकार पूरे देश को तानाशाही की ओर ले जा रही है।
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि हालांकि साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के लिए एक मजबूत सिस्टम की आवश्यकता है, लेकिन सरकार का यह आदेश नागरिकों के निजी जीवन में अनावश्यक दखलंदाजी है। उन्होंने इसे एक ‘जासूसी एप’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चर्चा करने और अपनी रणनीति तय करने के लिए बैठक करेगी। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल और रेणुका चौधरी ने भी इस आदेश की आलोचना की है, जिसमें रेणुका चौधरी ने सदन स्थगन नोटिस भी दिया।
इस विवाद पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सफाई देते हुए कहा कि यह एप अनिवार्य नहीं है और उपयोगकर्ता चाहें तो इसे डिलीट कर सकते हैं। यह बयान सरकार के पहले के उस रुख के विपरीत है जिसमें इसे सभी मोबाइल फोन में प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य बताया गया था।
सूत्रों के अनुसार, सरकार का उद्देश्य इस एप के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी, फर्जी IMEI नंबरों के उपयोग और मोबाइल फोन की चोरी जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाना है। आदेश में एप्पल, सैमसंग, वीवो, ओप्पो और शाओमी जैसी प्रमुख मोबाइल कंपनियों को इस एप को अपने उपकरणों में प्री-इंस्टॉल करने के लिए 90 दिनों का समय दिया गया है। यह भी बताया गया है कि यूजर्स इस एप को डिलीट या डिसेबल नहीं कर सकेंगे और पुराने फोन पर सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए यह इंस्टॉल हो जाएगा। हालांकि, यह आदेश अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है और इसे चुनिंदा कंपनियों को निजी तौर पर भेजा गया है।
