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स्मार्टफोन की लत बच्चों की एकाग्रता छीन रही, चिड़चिड़ापन बढ़ा रही: डॉक्टरों की चेतावनी

By Dec 2, 2025

आज के हाईटेक युग में बच्चों के हाथों में बैट-बॉल की जगह स्मार्टफोन का दिखना आम हो गया है। पढ़ाई के बाद बच्चे अपना अधिकांश समय मोबाइल पर ही बिता रहे हैं, जिसका सीधा असर उनके मानसिक स्वास्थ्य और एकाग्रता पर पड़ रहा है। शहर के जाने-माने चिकित्सकों के अनुसार, स्मार्टफोन के इस अत्यधिक उपयोग से बच्चों में एकाग्रता में भारी कमी आई है और उनका चिड़चिड़ापन काफी बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहने से बच्चों का ध्यान भटकता है और उनमें तनाव का स्तर बढ़ता है। यह स्थिति इतनी गंभीर होती जा रही है कि बच्चों में गुस्सा, बेचैनी और हाइपरटेंशन जैसी शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। पढ़ाई और गेमिंग के लिए उपकरणों का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की मानसिक ऊर्जा को क्षीण कर रहा है, जिससे उनकी सीखने की क्षमता और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति प्रभावित हो रही है।

चिकित्सकों ने अभिभावकों को इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देने की सलाह दी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस आदत पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों के लिए स्मार्टफोन या अन्य डिजिटल उपकरणों के उपयोग की एक निश्चित समय-सारणी बनाएं। इसके साथ ही, घर में एक सकारात्मक और सहयोगी माहौल प्रदान करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

घर में अधिक समय बिताने और गैजेट्स में खोए रहने के कारण बच्चों में एटेंशन डेफिसिट व्यवहार भी देखा जा रहा है, जो तनाव और चिंता को और बढ़ाता है। इसके अलावा, यह आदत बच्चों को सामाजिक रूप से अलग-थलग भी कर सकती है, जिससे उनके सामाजिक कौशल का विकास बाधित होता है। इसलिए, यह आवश्यक है कि बच्चों को शारीरिक गतिविधियों में भी संलग्न किया जाए। रोज सुबह घर के आसपास पार्क में टहलना, दोस्तों के साथ खेलना और शिक्षकों व परिवार के सदस्यों के साथ संवाद बनाए रखना उनके समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है। बच्चों को भावनात्मक सहारे की जरूरत है, न कि किसी तरह के दबाव की, ताकि वे एक स्वस्थ जीवन जी सकें।

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