स्मार्ट सिटी का संजय सरोवर: डेढ़ लाख की राशि बनी रोड़ा, अब ग्लोबल टेंडर की तैयारी
बरेली शहर में पर्यटन विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण संजय कम्युनिटी सरोवर परिसर के संचालन को लेकर एक बार फिर से नई निविदा प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत विकसित किए गए इस परिसर के संचालन के लिए आवश्यक धन राशि का न मिलना एक बड़ी समस्या बन गया है। सूत्रों के अनुसार, अब इस परियोजना के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक एजेंसियां इसमें भाग ले सकें और बेहतर प्रस्ताव मिल सकें।
स्मार्ट सिटी के तहत शहर के सिविल लाइंस स्थित संजय कम्युनिटी हॉल परिसर का 11 करोड़ रुपये की लागत से सुंदरीकरण और जीर्णोद्धार किया गया था। पिछले वर्ष, एक निविदा प्रक्रिया के बाद, मकसद बिल्डिकान प्राइवेट लिमिटेड को इस परिसर के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस समझौते के तहत, एजेंसी को प्रति वर्ष लगभग डेढ़ लाख रुपये का भुगतान करना तय हुआ था।
हालांकि, यह राशि परियोजना के संचालन और रखरखाव के लिए अपर्याप्त मानी गई। इस पर उच्चाधिकारियों ने पुनः विचार करने और मामले को सुलझाने के निर्देश दिए। दैनिक जागरण द्वारा अधूरी परियोजनाओं को लेकर चलाए गए समाचारीय अभियान के बाद जिम्मेदारों में खलबली मच गई। अब संभावना है कि जल्द ही होने वाली बोर्ड बैठक में इस परियोजना के लिए नए सिरे से निविदाएं आमंत्रित करने का निर्णय लिया जाएगा।
इस परिसर में बरेली कॉलेज और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए 30 कारों की क्षमता वाली मल्टीलेवल कार पार्किंग भी विकसित की गई है। इसके अतिरिक्त, सरोवर परिसर में 16 कियोस्क और स्मार्ट टॉयलेट का भी निर्माण किया गया है। लेकिन, संचालन न होने के कारण ये सभी सुविधाएं वर्तमान में अनुपयोगी पड़ी हैं।
अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर के पहले सप्ताह में स्मार्ट सिटी बोर्ड की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने की संभावना है। इस बैठक में परियोजना के संचालन और नई निविदा प्रक्रिया को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। साथ ही, संचालन में हो रही देरी और बाधाओं पर भी गहन मंथन किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, संजय कम्युनिटी हॉल परिसर के संचालन के लिए पिछले दो वर्षों से निविदा प्रक्रिया चल रही है। चार बार निविदाएं आमंत्रित करने और प्रक्रिया पूरी होने के बाद पांचवीं बार में मकसद बिल्डकान एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन, कार्यदायी संस्था द्वारा संचालन के लिए निर्धारित धनराशि अपेक्षा से बहुत कम होने के कारण जिम्मेदारों ने इस पर फिर से विचार करने का निर्णय लिया है। यह उम्मीद जताई जा रही है कि अब जो एजेंसी सबसे अधिक धनराशि का प्रस्ताव देगी, उसे ही संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिसके लिए ग्लोबल टेंडर की रणनीति अपनाई जा रही है। मंडलायुक्त ने भी इस मामले में पुनः मंथन कर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
