असम में पुलिस हिरासत और मुठभेड़ों में 80 मौतें, जेलें लगभग भरी
असम सरकार ने हाल ही में राज्य विधानसभा में एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया है, जिसके अनुसार साल 2021 से लेकर अब तक पुलिस हिरासत और मुठभेड़ों में कुल 80 लोगों की मौत हो चुकी है। यह जानकारी राज्य के मंत्री रूपेश गोला ने एक प्रश्न के जवाब में दी।
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इन 80 मौतों में से 39 लोगों की जान पुलिस हिरासत के दौरान हुई, जबकि 41 अन्य संदिग्धों की मौत अदालत में पेशी से पहले हिरासत में ही हो गई। इसके अलावा, इन चार वर्षों की अवधि में पुलिस मुठभेड़ों के दौरान 223 संदिग्ध अपराधी घायल भी हुए हैं। मौतों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021 में 31, 2022 में 18, 2023 में 13, 2024 में 10 और इस साल 19 नवंबर तक आठ मौतें दर्ज की गईं। इसी तरह, घायलों की संख्या 2021 में 67, 2022 में 79, 2023 में 35, 2024 में 35 और इस साल अब तक सात रही है।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन सभी मामलों में नियमानुसार मजिस्ट्रेट जांच की गई है। मंत्री रूपेश गोला ने बताया कि कुल 180 मामलों में मजिस्ट्रियल जांचें दंड प्रक्रिया संहिता और भारत नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत संपन्न हुईं। उन्होंने आश्वस्त किया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया गया है, जिसके तहत पुलिस कार्रवाई के दौरान किसी भी मौत की सूचना 48 घंटे के भीतर संबंधित प्राधिकारी को भेजना अनिवार्य होता है। कछार जिले में तीन हमार युवाओं की कथित मुठभेड़ मौत के मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
इसी सत्र के दौरान, विपक्ष के नेता देवव्रत सैकिया ने राज्य की जेलों की क्षमता और वर्तमान स्थिति पर भी सवाल उठाए थे। इसके जवाब में मंत्री ने बताया कि असम की जेलों में कुल 11,372 कैदियों को रखने की क्षमता है, जबकि वर्तमान में 11,241 कैदी विभिन्न जेलों में अपनी सजा काट रहे हैं। यह आंकड़ा जेलों की क्षमता के लगभग करीब है, जो राज्य में भीड़भाड़ की स्थिति को दर्शाता है।
