असम में बहुविवाह पर सख्त कानून, 10 साल तक की सजा का प्रावधान
असम विधानसभा ने बहुविवाह पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से ‘असम निषेध बहुविवाह विधेयक, 2025’ को भारी बहुमत से पारित कर दिया है। इस नए कानून के प्रावधानों के अनुसार, बहुविवाह में लिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों को सात साल तक की कैद की सजा का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, यदि कोई व्यक्ति पहले से विवाहित होते हुए भी दूसरी शादी की जानकारी छुपाता है, तो उसे दस साल तक की कठोर कारावास की सजा सुनाई जा सकती है।
विधेयक पारित होने से पहले, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधानसभा में इस बात पर जोर दिया कि यह कानून किसी भी तरह से इस्लाम धर्म के विरुद्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि सच्चे मुस्लिम इस कानून का स्वागत करेंगे, क्योंकि इस्लाम स्वयं बहुविवाह को बढ़ावा नहीं देता। उन्होंने यह भी कहा कि तुर्की जैसे देशों ने भी बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया है और पाकिस्तान में भी इसके लिए मध्यस्थता परिषदें हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया कि यदि वे अगले वर्ष मुख्यमंत्री बनते हैं, तो वे विधानसभा के पहले सत्र में ही समान नागरिक संहिता (UCC) भी लागू करेंगे।
विधेयक के पारित होने पर एआईयूडीएफ के विधायक अमीनुल इस्लाम ने सदन में इसका विरोध करते हुए कहा कि यह विधेयक संविधान के कुछ अनुच्छेदों का उल्लंघन करता है।
नए कानून के तहत, केवल मुख्य अपराधी ही नहीं, बल्कि बहुविवाह कराने या उसमें सहायता करने वालों को भी दंडित किया जाएगा। माता-पिता, ग्राम अधिकारी और धार्मिक नेता जो ऐसी शादियों में शामिल होते हैं, विवाह संपन्न कराते हैं या संबंधित जानकारी छिपाते हैं, उन्हें दो साल तक की जेल की सजा हो सकती है। कानून में बार-बार अपराध करने वालों के लिए और भी सख्त दंड का प्रावधान है, हालांकि इसके विशिष्ट विवरण अभी जारी किए जाने हैं।
इस कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को असम सरकार द्वारा वित्त पोषित या सहायता प्राप्त सार्वजनिक रोजगार के लिए अयोग्य घोषित किया जाएगा। साथ ही, वे राज्य सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं उठा पाएंगे और असम में चुनाव लड़ने के लिए भी पात्र नहीं होंगे।
बहुविवाह अब असम में एक संज्ञेय आपराधिक अपराध बन गया है। इसका मतलब है कि पुलिस बिना वारंट के ऐसे मामलों में संदिग्धों को गिरफ्तार कर सकती है और शिकायत मिलते ही तुरंत जांच शुरू कर सकती है।
इस नए कानून के तहत, अवैध बहुविवाह की पीड़ित महिलाओं को वित्तीय मुआवजा भी प्रदान किया जाएगा। राज्य सरकार एक प्राधिकरण नियुक्त करेगी जो मामले-दर-मामले आधार पर ऐसे मुआवजे का आकलन और निर्धारण करेगा।
