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सीएमपीएफ धनबाद में 3.64 करोड़ का पेंशन घोटाला, सीबीआई जांच शुरू

By Nov 29, 2025

धनबाद स्थित कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफ) कार्यालय में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिसमें 142 लोगों को लगभग 3 करोड़ 64 लाख 48 हजार 52 रुपये की राशि पेंशन एरियर के तौर पर गलत तरीके से भुगतान की गई है। यह मामला सीएमपीएफ विजिलेंस विभाग की जांच में सामने आया, जिसके बाद मुख्य सतर्कता आयोग ने इसकी गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है। शुक्रवार को सीएमपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है।nnnइस घोटाले में सीएमपीएफ के क्षेत्रीय कार्यालय धनबाद वन व टू के साथ-साथ विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों की मिलीभगत होने का संदेह है। विजिलेंस विभाग ने ही इस मामले को कोयला मंत्रालय और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के समक्ष उठाया था, जिसके बाद सीबीआई जांच की सिफारिश की गई। प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया है कि घोटाले से संबंधित महत्वपूर्ण फाइलें गायब कर दी गई हैं, जिससे जांच में बाधा उत्पन्न हो रही है।nnnविजिलेंस की जांच के अनुसार, मार्च 2016 से सितंबर 2016 के बीच कुल 142 पेंशन दावों का निष्पादन किया गया था। जब सतर्कता विभाग ने इन फाइलों की मांग की, तो क्षेत्रीय कार्यालय से इन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। कार्यालय द्वारा पत्र के माध्यम से सूचित किया गया कि ये फाइलें उपलब्ध नहीं हैं, जिसके बाद पूरा मामला संदेह के घेरे में आ गया।nnnमुख्य सतर्कता अधिकारी के निर्देश पर, सतर्कता अनुभाग ने 2022 से 2024-2025 तक इन 142 पेंशन फाइलों से संबंधित गहन जांच-पड़ताल की। इस दौरान कई अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम सामने आए, जिनमें कोलियरी, यूनिट के नाम और उस समय के सीएमपीएफ के कार्यवाहक सहायक शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों के नाम जांच में सामने आए हैं, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।nnnजांच के दौरान, विजिलेंस टीम ने 142 पेंशन फाइलों से संबंधित सालाना (वीवी) स्टेटमेंट की भी बारीकी से जांच की। इसमें बीसीसीएल के राजपुर ओसीपी, ईस्ट भगतडीह और दोबारी में कुल 95 पेंशनरों का निष्पादन पाया गया। इन 95 पेंशनरों के नामों का वीवी स्टेटमेंट से मिलान करने पर पाया गया कि कुछ सदस्यों के नाम स्टेटमेंट में दर्ज ही नहीं थे, जबकि कुछ के नाम दर्ज थे लेकिन उनके पेंशन अंशदान का भुगतान सेवानिवृत्ति के समय ही किया जा चुका था (वीवी स्टेटमेंट में पेंशन अंशदान के आगे ‘पी’ अंकित था)। इस विसंगति ने घोटाले की पुष्टि की है।”

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