सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: उपभोक्ता को मिली राहत, एफडीआर के 24.84 लाख रुपये वापस
कोटा, राजस्थान: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम के ऐतिहासिक फैसले में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने एक उपभोक्ता को 24.84 लाख रुपये की धनराशि वापस की। यह मामला रोहित जौहरी, निवासी श्रीनाथपुरम, कोटा का था, जिन्होंने अधिवक्ता अमन चौधरी के माध्यम से आयोग में परिवाद दायर किया था।
वादी ने आरोप लगाया था कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने जून 2010 में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की सिकन्दरा शाखा में 10 लाख रुपये की एफडी कराई थी। बैंक द्वारा एफडी के दस्तावेज भी प्रदान किए गए थे। यह एफडी छह माह की थी और वादी लगातार इसका नवीनीकरण कराते रहे।
वर्ष 2014 में जब वादी को पैसों की आवश्यकता पड़ी, तो वे और उनकी पत्नी एफडी तुड़वाने बैंक पहुंचे। बैंक ने उन्हें बताया कि संबंधित एफडीआर की कोई प्रविष्टि बैंक के अभिलेखों में नहीं है। इसके बाद, वादी ने बैंक को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन कोई भुगतान नहीं हुआ।
सूत्रों के अनुसार, वादी ने उपभोक्ता आयोग में न्याय की गुहार लगाई, जिसके बाद आयोग ने बैंक को उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार ने बैंक को वादी को 24.84 लाख रुपये का चेक सौंपने का आदेश दिया।
यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए एक मिसाल है जो बैंक और वित्तीय संस्थानों से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इस मामले ने उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के महत्व को उजागर किया है और यह भी दिखाया है कि न्यायपालिका उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
आयोग के इस फैसले से प्रभावित उपभोक्ता ने संतोष व्यक्त किया और कहा कि उन्हें न्याय मिला है। इस फैसले से अन्य उपभोक्ताओं में भी आत्मविश्वास बढ़ेगा कि वे अपनी शिकायतों को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं और न्याय प्राप्त कर सकते हैं।
यह मामला बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भी एक संदेश देता है कि उन्हें उपभोक्ताओं के साथ अधिक पारदर्शिता और जिम्मेदारी से पेश आना चाहिए।
इस फैसले ने न केवल उपभोक्ता को राहत दी है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि वित्तीय संस्थानों को अपनी सेवाओं में सुधार करना होगा और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करनी होगी।
