भक्ति, ज्ञान और वैराग्य पर साध्वी प्रियंका शास्त्री का प्रवचन, Bhagalpur news में भागवत कथा का महत्व बताया
भागलपुर के कहलगांव स्थित नंदलालपुर चैती दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्री शतचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन कथा वाचिका साध्वी प्रियंका शास्त्री ने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के महत्व पर विस्तार से प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि भौतिकता से भरे कलियुग में भक्ति ही वह मार्ग है, जो ज्ञान व वैराग्य को जागृत रखकर ईश्वर प्राप्ति का रास्ता प्रशस्त करती है। साध्वी प्रियंका शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा रूपी ज्ञान यज्ञ ही भक्ति को दृढ़ करने का एकमात्र उपाय है।
उन्होंने राजा परीक्षित और सुखदेव के जन्म व संवाद प्रसंग पर प्रकाश डाला। साध्वी जी ने बताया कि जब देवर्षि नारद जी वृंदावन पहुंचे तो उन्होंने भक्ति माता को वृद्धावस्था में पाया, जबकि उनके पुत्र ज्ञान और वैराग्य अचेत अवस्था में पड़े थे। इसका मुख्य कारण कलियुग में धर्म का ह्रास और समय की परिवर्तनशीलता बताया गया।
साध्वी प्रियंका शास्त्री ने कहा कि सनकादि ऋषियों ने नारद जी को बताया कि भागवत कथा रूपी ज्ञान यज्ञ ही भक्ति को दृढ़ करने का एकमात्र उपाय है। कथा के अनुसार, गंगा तट पर श्रीमद भागवत कथा का श्रवण होते ही भक्ति माता पुनः तरुण होकर नृत्य करने लगीं और ज्ञान तथा वैराग्य भी पुनः सक्रिय हो उठे। उन्होंने जोर देकर कहा कि जहां श्रीमदभागवत की कथा होती है, वहां भक्ति, ज्ञान और वैराग्य स्वतः निवास करते हैं।
