सैयद माजरा टोल प्लाजा पर वसूली जारी, वाहन चालकों को नहीं मिली राहत
सहारनपुर में वाहन चालकों को टोल टैक्स से राहत मिलने की उम्मीदें फिलहाल धूमिल हो गई हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सैयद माजरा टोल प्लाजा को गणेशपुर में शिफ्ट करने की अपनी पूर्व योजना को अचानक बदल दिया है। अब इसी स्थान पर टोल वसूली जारी रहेगी, जिसका सीधा असर बसों, कारों और भारी वाहनों के चालकों व मालिकों पर पड़ेगा।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के नियमों के तहत, दो टोल प्लाजा के बीच न्यूनतम दूरी 60 किलोमीटर निर्धारित है। गणेशपुर में नया टोल प्लाजा स्थापित होने के बाद, सैयद माजरा टोल प्लाजा इस मानक पर खरा नहीं उतरता। यह टोल प्लाजा पंचकूला-सहारनपुर-रुड़की और दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून, दोनों ही महत्वपूर्ण राजमार्गों पर स्थित है। इस वजह से इन दोनों मार्गों पर यात्रा करने वाले वाहनों को अतिरिक्त टोल शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा।
दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे पर गणेशपुर के पास टोल प्लाजा पर भी जल्द ही शुल्क वसूली शुरू होने वाली है। ऐसे में, इस मार्ग पर आने-जाने वाले वाहनों को एक अतिरिक्त टोल टैक्स देना होगा। वहीं, रुड़की-पंचकुला मार्ग पर भगवानपुर के पास पहले से ही एक टोल प्लाजा स्थापित है। इन परिस्थितियों में, दोनों ही राजमार्गों पर टोल प्लाजा के बीच की न्यूनतम दूरी के मानकों की घोर अनदेखी की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, सैयद माजरा टोल प्लाजा से गणेशपुर टोल प्लाजा की दूरी लगभग 23 किलोमीटर है, जो निर्धारित 60 किलोमीटर के मानक से काफी कम है। इसके अतिरिक्त, इसी राजमार्ग पर सरसावा के निकट एक और टोल प्लाजा है, जिसकी दूरी सैयद माजरा टोल प्लाजा से लगभग 48 किलोमीटर है। इन सभी दूरियों को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि राजमार्ग मंत्रालय द्वारा निर्धारित न्यूनतम दूरी के मानकों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है।
एनएचएआई के अधिकारी इस नई योजना के संबंध में खुलकर कुछ भी बताने से कतरा रहे हैं। लगभग तीन महीने पहले सैयद माजरा टोल प्लाजा को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिससे स्थानीय लोगों और वाहन चालकों में राहत की उम्मीद जगी थी। लेकिन अब इस फैसले के बदलने से यात्रियों और वाहन स्वामियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
