ईसाई समाज का नववर्ष: बैंगनी वस्त्रों में पुरोहित, धार्मिक आयोजनों पर विराम
ईसाई समाज ने अपने नव पूजन वर्ष का शुभारंभ किया है, जिसकी शुरुआत आगमन काल (एडवेंट सीजन) से होती है। इस विशेष अवधि में गिरिजाघरों में प्रार्थनाओं का दौर चला, जिसमें पवित्र मिस्सा-अर्पण और आध्यात्मिक प्रवचन शामिल रहे। आगरा महाधर्म प्रांत के महा धर्माध्यक्ष डॉ. राफी मंजलि ने निष्कलंक माता महागिरजाघर में मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभु ईसा मसीह का पुनरागमन निश्चित है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन को ऐसा बनाएं कि वे प्रभु के बुलाने पर एक दयालु और प्रेमी न्यायकर्ता से मिलने के योग्य हों।
सेंट मेरीज चर्च में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा में फादर संतोष ने आगमन काल के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह प्रभु के आगमन की तैयारी का समय है, जो पश्चाताप, आत्मनिरीक्षण, संयम, दान और सेवा पर केंद्रित होता है। इस काल में ईसाई पूजन वर्ष के विभिन्न कालों में से एक, आगमन काल का आरंभ होता है, जो लगभग तीन से चार सप्ताह का होता है।
आगमन काल की अपनी विशेष परंपराएं हैं। इस अवधि में चर्चों को विशेष रूप से सजाया नहीं जाता, न ही वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है। पूजा वेदी पर फूल भी नहीं सजाए जाते। पुरोहित बैंगनी वस्त्र धारण करते हैं, जो पश्चाताप और आत्म-चिंतन का प्रतीक है। आगमन काल के प्रत्येक रविवार को एक-एक करके चार रंगीन मोमबत्तियां जलाई जाती हैं, जो क्रमशः आशा, विश्वास, आनंद और शांति का प्रतिनिधित्व करती हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि आगमन काल के दौरान विवाह समारोह जैसे मांगलिक कार्यक्रम भी सामान्यतः आयोजित नहीं किए जाते हैं। पुरोहित अपने प्रवचनों के माध्यम से सादा जीवन, भलाई, दान-पुण्य, गरीबों की सहायता और आध्यात्मिक तैयारी पर विशेष बल देते हैं। क्रिश्चियन समाज सेवा सोसायटी के अध्यक्ष डेनिस सिल्वेरा ने समस्त ईसाई समुदाय को नए पूजा-वर्ष की शुभकामनाएं दीं और आगामी महापर्व क्रिसमस की आध्यात्मिक तैयारी में जुटने का आह्वान किया।
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