0

रूरा: भागवत कथा में आचार्य ने बताया, गुरु-मित्र से छल करने पर क्यों आती है दरिद्रता

By Feb 9, 2026

कानपुर देहात के बनीपारा गांव स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में 14वें श्री विष्णु महायज्ञ एवं मानस संगीत सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के अंतिम दिन आचार्य चंद्रशेखर ने सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि सुदामा एक दीनहीन ब्राह्मण नहीं, बल्कि निष्काम कर्मयोगी थे। अपने कर्मयोग के बल पर उन्होंने ईश्वर का सानिध्य प्राप्त किया।

आचार्य ने कथा सुनाते हुए बताया कि निष्काम कर्मयोगी व भगवान के अनन्य भक्त होने के बाद भी सुदामा को बाल्यावस्था में अपने मित्र श्रीकृष्ण से गुरु माता के दिए चने छिपाकर खाने में दरिद्रता का दंश मिला। उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन में मनुष्य को तनाव में जीने के बजाय संतोषी बन जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से गुरु व मित्र से छल करने से बचने का संदेश दिया।

कथावाचक ने कहा कि सुदामा की मित्रता भगवान के साथ नि:स्वार्थ थी। उन्होंने कभी उनसे सुख साधन या आर्थिक लाभ प्राप्त करने की कामना नहीं की। उनके संतोष व ईश्वर की निश्छल भक्ति ने उनको वैभव के साथ परम पद प्रदान कर दिया। उन्होंने कहाकि भक्ति भाव से जब भगवान में वात्सल्य जागता है, तो भक्त का कल्याण स्वयं ही हो जाता है। इस मौके पर यज्ञाचार्य रामदत्त दीक्षित ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ की पूर्णाहुति संपन्न कराई। सोमवार को यहां भंडारे में प्रसाद वितरण होगा।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें