निजी रिश्तों की जांच के लिए नहीं है RTI: सूचना आयोग का बड़ा फैसला
राज्य सूचना आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि RTI अधिनियम का उद्देश्य सार्वजनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, न कि निजी वैवाहिक संबंधों की जांच-पड़ताल करना। आयोग ने यह टिप्पणी संतकबीर नगर की एक महिला द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए की।
महिला ने अपने पति से अलगाव के बाद RTI के तहत आवेदन किया था। उसने ग्राम प्रधान से यह जानकारी मांगी थी कि क्या वह अभी भी अपने पति की विधिक पत्नी है या नहीं। इसके अलावा, उसने यह भी जानना चाहा कि क्या उसके पति ने उसे तलाक दिए बिना किसी दूसरी महिला को पत्नी के रूप में रखा है और यदि हां, तो उस महिला से उत्पन्न बच्चों के नाम और उम्र क्या हैं।
जन सूचना अधिकारी ने इस पर जवाब दिया कि ग्राम पंचायत के अभिलेखों में ऐसी कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। आवेदिका ने इस जवाब को चुनौती देते हुए आयोग के समक्ष अपील दायर की।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि किसी ग्राम पंचायत से यह अपेक्षा करना कि वह नागरिकों के वैवाहिक जीवन या निजी संबंधों का रिकॉर्ड रखे, RTI अधिनियम की भावना का अनावश्यक विस्तार है। आयोग ने स्पष्ट किया कि RTI अधिनियम पारदर्शिता का माध्यम है, न कि स्त्री-पुरुष के निजी रिश्तों का सामाजिक रजिस्टर। आयोग ने कहा कि नागरिकों का RTI पर भरोसा बढ़ना सकारात्मक है, लेकिन यह भरोसा इस स्तर तक नहीं जाना चाहिए कि उससे ऐसी जानकारी उपलब्ध कराने की अपेक्षा की जाए जो अस्तित्व में ही नहीं है। आयोग ने जन सूचना अधिकारी के जवाब को पर्याप्त मानते हुए अपील को निस्तारित कर दिया।
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