सरकारी बंगलों पर राजद का सवाल, क्या है तहखाने का राज? Bihar politics news
राजद ने बिहार की राजनीति में सरकारी बंगलों को लेकर एक नया मुद्दा छेड़ दिया है। पार्टी ने सत्तारूढ़ एनडीए के प्रमुख नेताओं, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, सांसद देवेश चंद्र ठाकुर और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी की बहू दीपा मांझी के सरकारी बंगलों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सरकारी बंगलों पर उठाए गए मुख्य प्रश्न
राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. नवल किशोर यादव ने भवन निर्माण विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर जानना चाहा है कि संजय झा और देवेश चंद्र ठाकुर किस नियम के तहत अभी तक सरकारी बंगलों पर काबिज हैं, जबकि वे अब उस हैसियत में नहीं हैं जिसके आधार पर उन्हें ये बंगले आवंटित किए गए थे। पार्टी ने यह भी पूछा है कि क्या वे बंगलों में बने रहने के लिए अनुमानित किराये की दस गुना राशि का भुगतान कर रहे हैं, और यदि नहीं, तो किस रसूख से वे वहां जमे हुए हैं।
दीपा मांझी के बंगले पर भी सवाल
इसी क्रम में, केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी की बहू दीपा मांझी को आवंटित सेंट्रल पुल के बंगले पर भी सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने पूछा है कि क्या विधायक मात्र होने के नाते उन्हें यह बंगला नियमानुसार आवंटित हो सकता है, और क्या इसके लिए कोई वरीयता निर्धारित है।
तहखाने की आशंका और बंगले खाली करने की समय-सीमा
राजद ने इन बंगलों को खाली करने की समय-सीमा पर भी प्रश्न उठाया है। पार्टी ने आशंका जताई है कि कहीं इन बंगलों में कोई तहखाना तो नहीं छिपा है, जिसे छुपाने के मोह में लोग बंगला खाली नहीं कर रहे। यह मुद्दा तब और गरमा गया है जब जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी बंगले में तहखाने की आशंका जताई थी। राबड़ी देवी को नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से 39, हार्डिंग रोड में शिफ्ट होने का नोटिस मिला है, लेकिन वे अभी भी 10, सर्कुलर रोड में बनी हुई हैं, जिसकी समय-सीमा 25 दिसंबर को ही समाप्त हो चुकी है।
यह पूरा मामला बिहार की राजनीति में बंगले की राजनीति को एक नए मोड़ पर ले आया है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
