रोजगार योजना से चमकी महिलाओं की किस्मत, आत्मनिर्भरता की नई उड़ान
पश्चिम चंपारण जिले में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का एक मजबूत जरिया बनकर उभरी है। इस योजना के माध्यम से अब तक कुल 7 लाख 20 हजार से अधिक महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये की राशि अंतरित की जा चुकी है। यह योजना उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हो रही है, जो पहले विभिन्न निजी चिट फंड कंपनियों पर आश्रित थीं और राशि के लिए दूसरों का मोहताज होना पड़ता था।
योजना के पहले चरण में लगभग 93 हजार महिलाओं को यह राशि प्राप्त हुई थी। उल्लेखनीय है कि राशि मिलने के एक सप्ताह के भीतर ही 1200 से अधिक महिलाओं ने स्वरोजगार की शुरुआत कर दी थी। जीविका के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के अनुसार, इस योजना का सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
कई महिलाओं ने इस आर्थिक सहायता का उपयोग कर अपनी पसंद के व्यवसाय को चुना और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ीं। उदाहरण के तौर पर, चंदामामा ग्राम संगठन के महावीर स्वयं सहायता समूह की सदस्य बुधिया देवी ने 10 हजार रुपये की राशि से एक किराना दुकान खोली। इस दुकान पर वह घर पर बने हस्तनिर्मित टोकरियों की बिक्री भी करती हैं। वर्तमान में उनकी दुकान से प्रतिदिन 500 से 550 रुपये की बिक्री हो जाती है।
इसी प्रकार, बहुअरवा पंचायत की रंभा देवी ने इसी राशि से एक सिलाई मशीन खरीदी और अब गांव के लोगों के लिए कपड़े सिलकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। जमुनिया पंचायत की नीतू देवी ने ओवन खरीदकर अपने व्यवसाय को और विस्तार दिया है, क्योंकि वह पहले से केक बनाने का काम करती थीं।
इस तरह की अनगिनत महिलाएं हैं जिन्होंने इस योजना के तहत स्वरोजगार शुरू किया है और अब वे अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाने के लिए सरकारी सहायता की प्रतीक्षा कर रही हैं, ताकि वे अपनी आर्थिक स्थिति को और अधिक मजबूत कर सकें। यह योजना वास्तव में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
