औरंगाबाद के जंगलों में अवैध अफीम की खेती का भंडाफोड़, दो एकड़ फसल नष्ट
औरंगाबाद जिले के मदनपुर और देव प्रखंडों के दुर्गम जंगली और पहाड़ी इलाकों में मादक पदार्थ तस्करों द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही अवैध अफीम की खेती का पर्दाफाश हुआ है। नारकोटिक्स विभाग से मिली गुप्त सूचना के आधार पर वन विभाग और पुलिस की एक संयुक्त टीम ने बुधवार को मदनपुर के घने जंगल क्षेत्र में एक बड़ा अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान, टीम ने लगभग दो एकड़ भूमि में लगी अफीम की फसल को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया।
यह घटना क्षेत्र में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के सक्रिय नेटवर्क की ओर इशारा करती है। इससे पहले भी इसी वर्ष नौ एकड़ क्षेत्र में अफीम की फसल नष्ट की जा चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि अभी भी जंगल के कई हिस्सों में खेती किए जाने की संभावना है। इसकी पहचान के लिए ड्रोन सर्वे का उपयोग किया जा रहा है। जिन स्थानों पर भी अफीम की फसल पाई जाएगी, वहां तत्काल विनष्टीकरण अभियान चलाया जाएगा।
वन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय पुलिस के अनुसार, सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई की जाती है। फसल नष्ट करने के साथ-साथ संबंधित आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाती है। वर्ष 2024 में देव और मदनपुर के जंगल क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती पकड़ी गई थी, जिसमें लगभग 85 एकड़ की फसल नष्ट की गई थी और नौ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसके बावजूद, इस वर्ष फिर से बुवाई का मामला सामने आना तस्करों के दृढ़ नेटवर्क को दर्शाता है।
जांच में यह बात सामने आई है कि इन तस्करों का जाल स्थानीय जंगल में रहने वाले ग्रामीणों से लेकर पड़ोसी राज्य झारखंड तक फैला हुआ है। अफीम के बीज झारखंड से मंगवाए जाते हैं और फिर स्थानीय ग्रामीणों की मदद से जंगल के अंदरूनी और दुर्गम इलाकों में खेती कराई जाती है। तस्कर फसल की सिंचाई और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं, जबकि स्थानीय लोगों को मजदूरी और देखरेख के लिए नियोजित किया जाता है। यह भी जानकारी मिली है कि गयाजी के छकरबंदा जंगल में भी बड़े पैमाने पर अफीम की खेती होती है, जिसे औरंगाबाद पुलिस अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर होने के कारण नियंत्रित करने में असमर्थ है। पुलिस इन गिरोहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।
