Ram Katha: भरत मिलाप प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु, अयोध्या लौटने की भरत की विनती
अखिल भारतीय श्री राम नाम जागरण मंच के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा के सातवें दिन भरत मिलाप का प्रसंग सुनाया गया। व्यासपीठ से कथावाचक संत रमेश भाई शुक्ल ने कहा कि श्रीराम के वनवास के बाद जब भरत अयोध्या लौटे तो उन्हें अपने भाई के वनगमन की जानकारी मिली। भरत इस समाचार से अत्यंत व्यथित हुए और अयोध्यावासियों के साथ श्रीराम को वापस लाने के लिए चित्रकूट की ओर प्रस्थान किया।
जब भरत चित्रकूट पहुंचे, तो वे सीधे श्रीराम के चरणों में गिर गए। श्रीराम ने उन्हें उठाकर गले लगा लिया। भरत ने रोते हुए श्रीराम से अयोध्या लौटकर राजपाठ संभालने की विनती की। हालांकि, श्रीराम ने अपने पिता के वचनों का पालन करने का दृढ़ निश्चय जताया और वनवास पूरा करने की बात कही।
भरत के अटूट प्रेम को देखकर श्रीराम ने उन्हें अपनी खड़ाऊं (खड़ाऊ) भेंट की। कथावाचक ने बताया कि भरत ने श्रीराम की खड़ाऊं को अपने शीश पर धारण किया और अयोध्या लौटकर राजपाठ संभाला। इस दौरान ‘राम भक्त ले चला रे राम की निशानी’ भजन पर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे। कथा से पूर्व सुबह पर्यावरण सुरक्षा के लिए यज्ञ में आहुतियां दी गईं और कथा विश्राम के बाद आरती उतारी आरती उतारी गई।
