आरक्षण कार्यालय में तत्काल टिकट के लिए यात्रियों में हुई मारपीट, दलालों पर पर्ची फाड़ने का आरोप
स्थानीय रेलवे स्टेशन के आरक्षण कार्यालय में गुरुवार रात तत्काल टिकट के लिए यात्रियों के बीच ज़बरदस्त झड़प हो गई। इस घटना ने आरक्षण व्यवस्था की पोल खोल दी, जहाँ तत्काल टिकट पाने की होड़ में यात्री आपस में उलझ पड़े और नौबत हाथापाई तक आ गई। कई यात्रियों ने दलालों पर आरोप लगाया कि उन्होंने कार्यालय के गेट पर चस्पा की गई नंबर की पर्ची को फाड़कर अपनी मनमानी पर्ची लगा दी, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
इस घटना के कारण आरक्षण कार्यालय में अफरातफरी का माहौल बन गया। कुछ यात्री, जिन्हें टिकट नहीं मिल सका, वे रात भर कार्यालय परिसर में ही खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हुए, जबकि अन्य स्टेशन परिसर में चले गए। तत्काल टिकट को लेकर यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार, यात्रियों को नंबर लगाने के लिए रोजाना धक्का-मुक्की करनी पड़ रही है।
कूड़ाघाट निवासी अजय, जो मुंबई के लिए कन्फर्म तत्काल टिकट लेने आए थे, ने बताया कि उन्होंने शाम को ही नंबर की पर्ची चस्पा कर दी थी और अन्य यात्री उसी क्रम में अपना नाम लिख रहे थे। लेकिन रात करीब नौ बजे एक व्यक्ति आया और पहले से लगी पर्ची को फाड़कर अपनी नई पर्ची लगा दी। जब इसका विरोध किया गया, तो वह अन्य यात्रियों से भिड़ गया।
रामकिशोर नामक एक अन्य यात्री ने बताया कि सुबह दस बजे मिलने वाले टिकट के लिए लोग एक दिन पहले शाम से ही आरक्षण कार्यालय में लाइन लगाकर सो जाते हैं, लेकिन फिर भी कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल है। संजय प्रसाद नामक यात्री ने बताया कि वह दो दिनों से मुंबई का कन्फर्म टिकट लेने के प्रयास में हैं, लेकिन उन्हें बार-बार वेटिंग टिकट ही मिल रहा है। कई ट्रेनों में किसी भी श्रेणी में कन्फर्म टिकट उपलब्ध नहीं है।
विशेष रूप से छठ पर्व के बाद दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। गोरखधाम, वैशाली, कुशीनगर और गोरखपुर-एलटीटी जैसी महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों के तत्काल कोटे के टिकट, जो ट्रेन छूटने से 24 घंटे पहले उपलब्ध होते हैं, वे महज एक मिनट में ही बुक हो जा रहे हैं। सामान्य कोटे के टिकट पहले से ही बुक रहते हैं और शेष टिकट हेडक्वार्टर कोटे से जारी होते हैं। ऐसी स्थिति है कि वेटिंग टिकट के लिए भी मारामारी मची है और कई ट्रेनों में तो वेटिंग टिकट भी मिलना बंद हो गया है।
जानकारों का कहना है कि रेलवे की टिकटिंग व्यवस्था में खामियां हैं और अवैध कारोबारियों ने सिस्टम में सेंध लगा ली है। उनके सॉफ्टवेयर रेलवे के सिस्टम से भी तेज गति से काम करते हैं, जिससे आम यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलना लगभग असंभव हो गया है।
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