आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी सामान्य श्रेणी में नहीं जा सकते: SC में याचिकाकर्ताओं की दलील
उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सामान्य वर्ग के याचिकाकर्ताओं ने अपनी दलीलें पेश कीं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जिन आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में छूट का लाभ उठाया और सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा (एटीआरई) में भी कम कटऑफ अंकों के आधार पर चयन प्राप्त किया, उन्हें बाद में सामान्य श्रेणी में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ कर रही है। सामान्य वर्ग के याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील मनीष सिंघवी ने अदालत को बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के हालिया फैसले ने उनकी नौकरी पर संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि आरक्षित वर्ग को टीईटी परीक्षा में आयु और शुल्क जैसी छूटें मिली थीं, जिस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि यह एक पात्रता परीक्षा है।
हालांकि, सिंघवी ने जोर देकर कहा कि सहायक शिक्षकों की सीधी भर्ती के लिए होने वाली एटीआरई परीक्षा एक खुली प्रतिस्पर्धा है। इस परीक्षा में सामान्य श्रेणी के लिए 65 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 60 प्रतिशत अंकों की कटऑफ निर्धारित थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, जब आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने एटीआरई परीक्षा में कम अंकों की छूट का लाभ उठाया है, तो वे बाद में अधिक अंकों के आधार पर सामान्य श्रेणी में शामिल होने का दावा नहीं कर सकते।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि हाई कोर्ट की खंडपीठ ने उन्हें सुने बिना ही मेरिट लिस्ट रद्द करने का आदेश दिया था, जिससे वे पक्षकार नहीं थे। हालांकि, आरक्षित वर्ग की ओर से पेश हुए वकील निधेश गुप्ता ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी भी हाई कोर्ट में पक्षकार थे और कोर्ट के आदेश पर सार्वजनिक सूचना भी जारी की गई थी।
मनीष सिंघवी ने विभिन्न पूर्व न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सामान्य श्रेणी में स्थानांतरण केवल तभी संभव है जब उम्मीदवार ने आयु या शुल्क जैसी छूट का लाभ उठाया हो, न कि परीक्षा में अंकों की छूट का। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि वे 2020 से लगातार नौकरी कर रहे हैं और अब उनकी नौकरियों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तारीख तय की है।
