ठाकुर बांकेबिहारी का स्वरूप धारण कर राधावल्लभलाल ने रिझाया, खिचड़ी उत्सव में झूमे श्रद्धालु
वृंदावन के ठाकुर राधावल्लभ मंदिर में चल रहे एक महीने लंबे खिचड़ी उत्सव में देश-दुनिया से आए श्रद्धालु भक्तिभाव में लीन हैं। इस उत्सव की एक अनूठी परंपरा है, जिसके तहत ठाकुरजी प्रतिदिन भक्तों को अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देकर रिझाते हैं। मान्यता है कि ठाकुरजी अपनी प्रिय राधाजी को प्रसन्न करने के लिए ये छद्मरूप धारण करते हैं।
मंगलवार को मंगला आरती के समय जब मंदिर के पट खुले, तो ठाकुर राधावल्लभलाल ने ठाकुर बांकेबिहारी का स्वरूप धारण किया हुआ था। आराध्य के इस विलक्षण रूप के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ कड़ाके की सर्दी के बावजूद भोर से ही मंदिर पहुंचने लगी थी। ठाकुरजी को पंचमेवा युक्त गर्म खिचड़ी का भोग लगाया गया।
मंदिर के सेवायतों ने जगमोहन में बैठकर पहले तो ‘जगार’ के पदों का गायन किया और फिर खिचड़ी उत्सव से संबंधित पदों का गायन शुरू किया। इसे सुनकर प्रांगण में मौजूद श्रद्धालु भक्ति के आनंद में डूब गए। मंदिर के सेवायतों ने बताया कि यह 310 वर्ष प्राचीन परंपरा है, जिसका निर्वहन वे प्रतिवर्ष करते हैं। इस उत्सव के दौरान प्रतिदिन ठाकुरजी भक्तों को नए-नए रूपों में दर्शन देकर आनंदित करते हैं।
