रायबरेली में ठगों का आतंक: खाते से उड़े 6.86 करोड़, साइबर अपराध के 1456 मामले दर्ज
रायबरेली में साइबर ठगों ने एक बार फिर अपनी करतूतों से लोगों को चौंका दिया है। इस बार ठगों ने एक खाते से करीब 6.86 करोड़ रुपये की भारी रकम उड़ा दी है। यह घटना जिले में बढ़ते साइबर अपराधों की भयावहता को उजागर करती है। इस वर्ष अब तक जिले में साइबर अपराध के कुल 1456 मामले दर्ज किए गए हैं, जो चिंताजनक है।
साइबर ठगों का गिरोह लोगों को बैंक अधिकारी बनकर या फिर अधिक मुनाफा दिलाने के लालच में ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) या संदिग्ध लिंक भेजकर अपना शिकार बनाता है। जानकारी के अभाव में आमजन, किसान और मजदूर अपनी मेहनत की कमाई गवां बैठते हैं। जिले में इस वर्ष साइबर ठगों ने लोगों के खातों से लगभग छह करोड़ 86 लाख रुपये उड़ाए हैं, जिनमें से पुलिस केवल 28.26 लाख रुपये ही बरामद कर पाई है।
डिजिटलीकरण ने जहाँ लोगों के जीवन को सुगम बनाया है, वहीं यह साइबर अपराधियों के लिए भी एक बड़ा अवसर बन गया है। जो लोग ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति सजग नहीं हैं, वे आसानी से इन ठगों का शिकार बन जाते हैं। पुलिस रिकॉर्ड में इस वर्ष 1456 शिकायतें दर्ज हुई हैं, लेकिन इनमें से केवल 88 मामलों में ही एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि, पुलिस जांच कर रही है और अब तक करीब 1.68 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में फ्रीज कराने में सफल रही है।
अपर पुलिस अधीक्षक, रायबरेली के अनुसार, साइबर ठग अक्सर दूसरे राज्यों और देशों से अपना नेटवर्क संचालित करते हैं। जागरूकता की कमी के कारण लोग उनकी जालसाजी का शिकार हो जाते हैं। इंटरनेट मीडिया पर पैसों का लालच देकर, डरा-धमकाकर या मोबाइल पर लिंक भेजकर ठगी की जाती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या ठगी की सूचना तत्काल 1930 पर दें। पुलिस ने बताया कि प्राप्त शिकायतों में से कई लोगों का पैसा वापस दिलाया गया है और अन्य मामलों की जांच जारी है।
हाल ही में, साइबर अपराधियों के मददगारों पर भी पुलिस का शिकंजा कसता दिख रहा है। एक्सिस बैंक के एक प्रबंधक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। यह घटनाएँ दर्शाती हैं कि साइबर अपराध का जाल कितना गहरा है और इससे निपटने के लिए बहुआयामी प्रयासों की आवश्यकता है। नागरिकों को अपनी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी सुरक्षित रखने के लिए सतर्क रहने और ऑनलाइन सुरक्षा उपायों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
