राष्ट्रीय मिर्गी दिवस 2025: मिर्गी से जुड़े 7 बड़े भ्रम, डॉक्टर ने बताई सच्चाई
मिर्गी एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समाज में व्याप्त डर व भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य से हर साल 17 नवंबर को ‘राष्ट्रीय मिर्गी दिवस’ (National Epilepsy Day 2025) मनाया जाता है। इस अवसर पर, न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों ने मिर्गी से जुड़े सात प्रमुख भ्रांतियों को दूर किया है, जो अक्सर लोगों के मन में भय और झिझक पैदा करती हैं। इन गलत धारणाओं के कारण न केवल इलाज में देरी होती है, बल्कि मिर्गी से पीड़ित व्यक्तियों के सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन पर भी गहरा असर पड़ता है। सही जानकारी और समझ इस बीमारी से बेहतर ढंग से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मिर्गी के दौरे केवल तेज झटकों या बेहोशी तक ही सीमित नहीं होते। कई दौरे बेहद हल्के होते हैं, जिनमें अचानक घबराहट, क्षणिक बेहोशी, अजीब अहसास या दोहराव वाली हरकतें शामिल हो सकती हैं। इन सूक्ष्म लक्षणों को पहचानना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे उचित निदान और उपचार में विलंब हो सकता है।
मिर्गी को एक विशुद्ध न्यूरोलॉजिकल बीमारी के रूप में समझा जाना चाहिए, जो मस्तिष्क में होने वाली असामान्य विद्युत गतिविधियों के कारण होती है। तनाव, नींद की कमी या भय जैसे कारक कुछ व्यक्तियों में दौरे को ट्रिगर कर सकते हैं, लेकिन वे इसके मूल कारण नहीं हैं। सिर की चोट, मस्तिष्क संक्रमण, स्ट्रोक, ट्यूमर, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन या मस्तिष्क की संरचनात्मक समस्याएं मिर्गी के वास्तविक कारण हो सकते हैं।
यह एक आम गलतफहमी है कि मिर्गी को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और दवाओं की मदद से, अधिकांश रोगी अपने दौरों को लगभग पूरी तरह नियंत्रित करने में सक्षम होते हैं। सही उपचार और, कुछ मामलों में, सर्जरी के माध्यम से, वे सामान्य जीवन जी सकते हैं, जिसमें पढ़ाई, नौकरी, यात्रा और पारिवारिक जिम्मेदारियां शामिल हैं। हालांकि, तैराकी या पैराग्लाइडिंग जैसी कुछ गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती है।
दौरे के दौरान व्यक्ति को पकड़ने या उनके मुंह में कुछ डालने की कोशिश करना अत्यंत खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसे समय में व्यक्ति को किसी चोट लगने वाली वस्तु से दूर ले जाएं, धीरे से करवट पर लिटाएं, और दौरे के समाप्त होने तक उनके पास रहें।
मिर्गी संक्रामक बीमारी नहीं है। मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति से यह बीमारी दूसरों में नहीं फैलती। हालांकि, कुछ संक्रमण जैसे वायरल या टीबी मस्तिष्क को प्रभावित कर सकते हैं और मिर्गी का कारण बन सकते हैं, लेकिन मिर्गी स्वयं किसी भी तरह से फैलने वाली नहीं है।
तेज चमकती रोशनी या स्क्रीन का मिर्गी के दौरों का कारण बनना केवल एक छोटे प्रतिशत (लगभग 3%) मिर्गी रोगियों में देखा जाता है। सामान्य परिस्थितियों में, स्क्रीन देखना या गेम खेलना अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित है, बशर्ते वे उचित अंतराल पर ब्रेक लें।
