राम मंदिर ध्वजारोहण: कलश यात्रा से शुरू हुए अनुष्ठान, सरयू तट पर पूजन
राम नगरी अयोध्या में 25 नवंबर को होने वाले राम जन्मभूमि पर नवनिर्मित मंदिर के भव्य ध्वजारोहण समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं। गुरुवार को कलश यात्रा के साथ ही विविध अनुष्ठानों का शुभारंभ हो गया। इस शुभ अवसर पर, धर्माचार्यों ने सबसे पहले सरयू तट पर पवित्र पूजन अर्चन किया।
यह कलश यात्रा अमृत काल और सर्वार्थ सिद्धि योग के शुभ संयोग में दोपहर बाद ढाई बजे निकाली गई। इस यात्रा में 551 से अधिक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जबकि 151 वैदिक छात्रों ने ध्वज लेकर शोभायात्रा का नेतृत्व किया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य और अनुष्ठान के यजमान, डॉ. अनिल मिश्र ने नवनिर्मित मंदिर के ध्वजारोहण समारोह के लिए प्रायश्चित पूजन किया।
संत तुलसीदास घाट से सरयू का पवित्र जल कलशों में भरकर यजमान डॉ. अनिल मिश्र और अन्य राम मंदिर परिसर पहुंचे, जहाँ आगे के अनुष्ठान संपन्न होंगे। यह पावन अनुष्ठान 21 नवंबर से शुरू होकर 25 नवंबर को अपने चरम पर पहुंचेगा। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर के 191 फीट ऊंचे भव्य शिखर पर ध्वजारोहण करेंगे।
मार्गशीर्ष अमावस्या के शुभ अवसर पर 20 नवंबर को प्रारंभ हुई कलश यात्रा ने पूरे शहर को एक उत्सवमय और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर कर दिया है। इसका समापन 25 नवंबर को विवाह पंचमी के शुभ मुहूर्त में होगा। अयोध्या में 23 से 25 नवंबर तक विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जिसमें लोक नृत्य, संगीतमय प्रस्तुतियां, सांस्कृतिक झांकियां और सप्त मंदिरों एवं छह छोटे मंदिरों की विशेष पूजा-अर्चना शामिल है।
पूरा शहर आकर्षक रोशनी, रंग-बिरंगी फूलों की सजावट और पारंपरिक रंगोलियों से सजाया जा रहा है। शहर की गलियों में सुबह-शाम राम धुन, मंत्रोच्चार और जयकारों की गूंज वातावरण को और अधिक पवित्र बना रही है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव ने बताया कि यह महोत्सव भारतीय संस्कृति, परंपरा और एकता का एक अद्भुत प्रतीक बनने जा रहा है। पूरे देश के प्रमुख संतों, विद्वानों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और लाखों श्रद्धालुओं को इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया गया है।
