राजनांदगांव में माओवादियों से मुठभेड़: हाकफोर्स निरीक्षक आशीष शर्मा शहीद, सुरक्षा बलों का संयुक्त अभियान
राजनांदगांव, छत्तीसगढ़: मध्य प्रदेश की सीमा से लगे छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के बोरतालाब के करीब कनघुर्रा जंगल में मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात को हुई मुठभेड़ में बालाघाट में पदस्थ हाकफोर्स निरीक्षक आशीष शर्मा शहीद हो गए। सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सुरक्षाबलों ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन चलाया था।
इसी दौरान माओवादियों की तरफ से हुई फायरिंग में हाकफोर्स निरीक्षक आशीष शर्मा को गोली लग गई। उनके शरीर में चार गोलियां लगी थीं। गंभीर रूप से घायल जवान को डोंगरगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
मुठभेड़ रात 2 से 4 बजे के बीच हुई बताई जा रही है। शहीद आशीष को सुबह 7-8 बजे डोंगरगढ़ के अस्पताल लाया गया। सूत्रों के अनुसार, आशीष शर्मा ने 14 जून 2023 को बालाघाट के कटेझिरिया के जंगल में तीन महिलाओं सहित चार माओवादियों को ढेर करने वाले ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी वीरता और साहस के लिए उन्हें हाल ही में पदोन्नति भी दी गई थी। वह बालाघाट के किरनापुर के किसी चौकी के प्रभारी थे।
मुठभेड़ के बाद इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है। सुरक्षा बलों ने माओवादियों की तलाश में जंगल को चारों तरफ से घेर लिया है। मौके पर तीनों राज्यों के आईजी और एसपी भी मौजूद हैं।
बताया गया कि एमएमसी (महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़) जोन के माओवादियों की मौजूदगी के इनपुट पर सीमा में संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया गया था। कनघुर्रा के घने जंगल में चारों ओर से घिरे माओवादियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग कर दी।
जानकारी के अनुसार, शहीद आशीष शर्मा मूल रूप से नरसिंहपुर जिले के गाडरवाड़ा अंतर्गत बोहानी गांव के निवासी थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई थी। शहीद आशीष की पार्थिव देह डोंगरगढ़ के अस्पताल में सुरक्षित रखी गई है। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव में होगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
इस पूरे मामले में बालाघाट के पुलिस अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने नहीं आया है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष 17 नवंबर को बालाघाट के कुंदुल के जंगल में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ में मुरैना के रहने वाले हाकफोर्स के आरक्षक शिवम कुमार शर्मा माओवादियों की गोली का शिकार हुए थे। एक साल के भीतर सुरक्षा बलों के एक और जवान की जान चली गई है।
