पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी जरूरी: IAS सुप्रिया साहू, तमिलनाडु news
नए साल में देश के सामने जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और घटती हरियाली जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए जनभागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए तमिलनाडु की आईएएस अधिकारी सुप्रिया साहू ने कहा कि पर्यावरण बचाने की मुहिम सरकारी होगी तो बंद हो जाएगी। उन्होंने जोर दिया कि इसे जनभागीदारी में बदलना जरूरी है। सुप्रिया साहू वर्तमान में तमिलनाडु सरकार में पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं वन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। उन्हें हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें तमिलनाडु में पारिस्थितिकी तंत्र बहाली और समुदाय-केंद्रित जलवायु परिवर्तन प्रबंधन में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए दिया गया।
नीलगिरि में ‘ऑपरेशन ब्लू माउंटेन’ की शुरुआत
सुप्रिया साहू ने अपने 30 साल के करियर में 23 साल से किसी न किसी पर्यावरणीय मुहिम की अगुवाई की है। उन्होंने बताया कि इस यात्रा की शुरुआत 23 साल पहले हुई, जब वह तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में कलेक्टर थीं। यह जिला यूनेस्को साइट वेस्टर्न घाट का हिस्सा है और जैव विविधता के लिहाज से देश के सबसे अहम इलाकों में से एक है। जिला भ्रमण के दौरान उन्होंने जंगली हाथियों और भालुओं को प्लास्टिक खाते हुए देखा। इस दृश्य ने उन्हें झकझोर दिया और उन्होंने नीलगिरि में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। यहीं से ‘ऑपरेशन ब्लू माउंटेन’ अभियान की शुरुआत हुई।
प्रतिबंध की नाकामी और जनभागीदारी का सबक
सुप्रिया साहू ने बताया कि शुरुआत में जब प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया गया तो उन्हें लगा कि सारी स्थितियां सुधर जाएंगी। हालांकि, कुछ महीनों बाद उन्हें एहसास हुआ कि प्रतिबंध का कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने अपनी गलतियों की समीक्षा की और नए सिरे से अभियान शुरू किया। इस बार उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं, स्कूल-कॉलेज और व्यापारी वर्ग को जोड़ा। उन्होंने एक वीडियो के जरिए लोगों को समझाया कि कैसे प्लास्टिक धरती, पानी और झीलों में हजारों साल तक बनी रहती है और जलाने पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने नीलगिरि के रहवासियों को समझाया कि यदि पर्यावरण को नुकसान हुआ तो आने वाले समय में उनकी आजीविका पर असर पड़ेगा।
प्लास्टिक चेकपोस्ट का सफल प्रयोग
जनभागीदारी को मजबूत करने के बाद भी जब प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद नहीं हुआ, तब उन्होंने ‘प्लास्टिक चेकपोस्ट’ का निर्माण किया। नीलगिरि के पहाड़ी हिस्से पर चढ़ने से पहले वरलियार इलाके में यह चेकपोस्ट बनाया गया। यहां हर गाड़ी की चेकिंग होती थी और प्लास्टिक की तीन चीजों (पॉलिथीन, प्लास्टिक के मैट्स और डिस्पोजेबल कप व प्लेट्स) पर प्रतिबंध लगाया गया। इस कदम के बाद धीरे-धीरे बड़ा बदलाव नजर आया। सुप्रिया साहू का मानना है कि केवल सरकारी ताकत से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण संभव है।
