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जौनसार बावर में माघ मरोज उत्सव की तैयारियां शुरू, 9 जनवरी से होगा पौष पर्व का आगाज – Uttarakhand Festival

By Jan 3, 2026

जौनसार बावर क्षेत्र में 9 जनवरी से परंपरागत पौष त्यौहार और माघ मरोज लोक उत्सव का शुभारंभ होने जा रहा है। हनोल के निकट स्थित कयलू महाराज मंदिर में चुराच के अनुष्ठान के बाद, 10 जनवरी को पारंपरिक तरीके से किसराट का पर्व मनाया जाएगा। इस लोक उत्सव का क्षेत्र में गहरा सांस्कृतिक महत्व है और यह मेहमाननवाजी के दौर को चिह्नित करता है, जिससे पंचायती आंगन उत्सवमय हो जाते हैं।

पौष त्यौहार और माघ मरोज का यह उत्सव सैकड़ों वर्ष पुरानी मान्यता से जुड़ा है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में टोंस नदी (जिसे पहले कर्मनाशा नदी कहा जाता था) में नरभक्षी किरमीर राक्षस का आतंक था। महासू देवता ने मानव कल्याण के लिए इस राक्षस का वध किया था, और उसी की खुशी में क्षेत्रवासी प्रतिवर्ष 26 पौष मास को इस लोक उत्सव के रूप में मनाते हैं।

इस परंपरा के अनुसार, जौनसार बावर की 39 खतों के 363 राजस्व गांवों के लोग घरों में बकरे काटकर मेहमानों का सत्कार करते हैं। कयलू महाराज मंदिर के पुरोहित मोहनलाल सेमवाल ने बताया कि 9 जनवरी को चुराच का पर्व मनाया जाएगा, जिसके अगले दिन बावर खत, देवघार, शिलगांव, बाणाधार, लखौ और आसपास के इलाकों में किसराट का त्यौहार मनाया जाएगा।

उत्सव के दौरान, स्थानीय लोग सुबह पहाड़ी लाल चावल के साथ उड़द की खिचड़ी (जिसे ‘मशयाड़ा भात’ कहते हैं) का सेवन करते हैं, जिसमें अखरोट, भंगजीरा और पोस्त दाने का मिश्रण होता है। इसे घी और तिल की चटनी के साथ परोसा जाता है। रात्रि भोज में बकरे का मांस, लाल चावल और रोटी मुख्य व्यंजन होते हैं।

पंचायती आंगनों में लोक नृत्यों का आयोजन होता है, और नौकरीपेशा लोग भी त्यौहार मनाने अपने पैतृक गांवों लौटते हैं। यह पर्व संयुक्त परिवार की अवधारणा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो सामाजिक सौहार्द और खुशहाली का प्रतीक है।

उत्सव की तैयारियों के चलते बकरों की मांग बढ़ गई है। क्षेत्र में मवेशी पालन के सीमित दायरे के कारण बकरों की कीमतें भी ऊंची हैं, जो 20,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक पहुंच रही हैं। कालसी, अंबाडी, बाडवाला, विकासनगर और देहरादून में लगने वाली बकरा मंडियों में खरीदारों की भीड़ देखी जा रही है। मान्यता है कि चुराच के बकरे के मांस का आधा हिस्सा टोंस नदी में किरमीर राक्षस के नाम से फेंका जाता है, ताकि क्षेत्र में कोई अमंगल न हो।

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