मनरेगा में बड़े बदलाव की तैयारी: फर्जीवाड़ा होगा बंद, गरीबों को मिलेगा समय पर पैसा; जानें सरकार का नया प्लान
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना को शुरू हुए लगभग दो दशक हो चुके हैं। इस लंबी अवधि में योजना में कई तरह की कमियां और विसंगतियां उभरकर सामने आई हैं। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार मनरेगा के संपूर्ण ढांचे में व्यापक सुधार पर गंभीरता से विचार कर रही है।
योजना में सुधार की जरूरत कई वजहों से महसूस की जा रही है। सबसे बड़ी समस्या मजदूरी भुगतान में देरी है, जहां 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं हो पाता और विलंब मुआवजा भी नगण्य होता है। इसके अलावा, कई राज्यों में फर्जी जाब कार्ड बनाकर करोड़ों रुपये की मजदूरी निकालने के मामले सामने आए हैं। डिजिटल हाजिरी प्रणाली में भी फोटो और डेटा दुहराव जैसी तकनीकी त्रुटियां सामने आईं, जिसके कारण कई राज्यों को मजबूरन मैन्युअल सत्यापन अपनाना पड़ा।
इन सारी विसंगतियों को दूर करने और योजना को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से सरकार अब व्यापक पुनर्संरचना पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, योजना के ढांचे में बदलाव के साथ इसके नाम में परिवर्तन पर भी मंथन चल रहा है।
सरकार ने भविष्य के जल संकट से निपटने के लिए अगले वर्ष देशभर में एक करोड़ नई जल संचय संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य तय किया है। इनका क्रियान्वयन जनसहभागिता और मनरेगा के तहत उपलब्ध राशि से किया जाएगा। जल संकट से सबसे अधिक प्रभावित डार्क जोन जिलों में मनरेगा फंड का 65 प्रतिशत, येलो जोन में 40 प्रतिशत और सामान्य जिलों में 30 प्रतिशत हिस्सा केवल जल संरक्षण संरचनाओं के लिए अनिवार्य किया गया है।
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