रिम्स में ‘कब्जा’ बनाम ‘कानून’: 48 घंटे बाद भी खाली नहीं हुई जमीन, नोटिस फाड़कर दी सीधी चुनौती
रांची के रिम्स परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराने के उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी 48 घंटे में कोई बदलाव नहीं आया है। रिम्स प्रबंधन ने नोटिस लगाए, पर कब्जाधारियों ने इसका कड़ा विरोध किया है। झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन ने भले ही कार्रवाई शुरू कर दी हो, लेकिन 48 घंटे बीत जाने के बाद भी जमीनी हालात में कोई बदलाव नहीं दिखा है।
रिम्स प्रबंधन ने अब तक परिसर के 148 स्थानों पर नोटिस चस्पा किए हैं, लेकिन एक भी अतिक्रमणकारी ने स्थल नहीं छोड़ा। उलटे शुक्रवार को कथित कब्जाधारियों ने बैठक कर स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी हाल में अपनी जमीन खाली नहीं करेंगे। गुरुवार को नोटिस लगाए जाने के बाद ही परिसर के कई हिस्सों में विरोध शुरू हो गया था। शुक्रवार को यह विरोध और तेज हो गया। प्रभावित परिवारों ने सामूहिक बैठक कर कहा कि वे वर्षों से यहां रह रहे हैं। उनके पास रजिस्ट्रेशन, म्यूटेशन और कर भुगतान के दस्तावेज तक मौजूद हैं। ऐसे में अचानक 72 घंटे में घर खाली करने का आदेश न तो तर्कसंगत है और न ही मान्य। कई लोगों ने कहा कि यदि प्रशासन उन्हें हटाना चाहता है, तो पहले पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब प्रबंधन द्वारा चस्पा किए गए नोटिसों को लोगों ने घरों से उतारकर फाड़ दिया। लोगों ने आरोप लगाया कि यह नोटिस स्वयं में अवैध है और उच्च न्यायालय के आदेश की आड़ में उन्हें अचानक बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि वर्षों से बनी बस्तियां, दुकानें, धार्मिक स्थल, सामुदायिक भवन और दूध काउंटर किसी भी तरह से अस्थायी अतिक्रमण की श्रेणी में नहीं आते।
इधर, रिम्स प्रशासन का दावा है कि परिसर की लगभग सात एकड़ जमीन पर पक्का और कच्चा निर्माण कर लिया गया है, जिसकी पुष्टि हाल में झालसा की टीम ने भी अपनी निरीक्षण रिपोर्ट में भी की है। टीम ने परिसर में पक्के मकान, दुकान, खेती और कई असंगठित निर्माणों का विवरण प्रशासन को सौंपा था। अदालत ने इन रिपोर्टों को गंभीरता से लेते हुए 72 घंटे की अवधि में कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। अब प्रशासनिक दबाव और स्थानीय विरोध दोनों के बीच रिम्स प्रबंधन कठिन स्थिति में है। शनिवार तक 72 घंटे की अवधि पूरी हो जाएगी और उसके बाद जिला प्रशासन व पुलिस बल की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
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