पीलीभीत EO पर गिरी गाज! फाइलों को रोकने और टालमटोल पर नवंबर का वेतन रोका, मांगा गया स्पष्टीकरण
पीलीभीत नगर पालिका में फाइलों को रोकने और काम में टालमटोल करने के आरोप में अधिशासी अधिकारी (ईओ) संजीव कुमार पर कार्रवाई की गई है। पालिकाध्यक्ष डा. आस्था अग्रवाल ने उनकी लापरवाही को देखते हुए नवंबर माह का वेतन रोक दिया है और उनसे इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है।
यह मामला तब गरमाया जब कर्मचारियों के स्थानांतरण निरस्त कर दिए गए, जिससे चेयरमैन सहित सभासद नाराज हो गए। आरोप है कि ईओ द्वारा कार्यों में देरी की जा रही है, फाइलों को अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है, जनसुनवाई में वे अनुपस्थित रहते हैं और शासनादेशों को भी किनारे किया जा रहा है। इन गंभीर आरोपों के चलते पालिकाध्यक्ष ने शासन को पत्र लिखा है और बोर्ड की संस्तुति पर ईओ का वेतन रोका गया है।
नगरपालिका की ओर से जारी टेंडर का वर्कआर्डर जारी न होने के कारण कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य रुके हुए हैं। 15वें वित्त आयोग और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में हो रही देरी पर भी पालिकाध्यक्ष ने ईओ को नोटिस जारी किया है। डीएम की स्वीकृति के बावजूद निविदा प्रकाशन और बिड खोलने में देरी हुई, जिससे विकास कार्य प्रभावित हुए।
निर्माण विभाग के कर्मचारियों ने भी बताया कि ईओ फाइलों को अपने पास रोक लेते हैं, जिससे कार्य आगे नहीं बढ़ पाते। टाइड ग्रांट के तहत कार्ययोजना तैयार करने में 60 दिनों की देरी और जन्म-मृत्यु पटल पर कार्यरत लिपिक के बारे में जारी निर्देशों का पालन न करने जैसे आरोप भी ईओ पर लगे हैं। ब्रह्मचारी घाट के सौंदर्याकरण और रिटेंशन वाल निर्माण में 18 माह से चल रही देरी पर भी कोई कार्रवाई न होने का जिम्मेदार उन्हें ठहराया गया है।
सफाई कर्मियों के स्थानांतरण को बिना अनुमोदन के निरस्त करने के मामले में भी ईओ को जिम्मेदार माना गया है। कई बार चेतावनियों के बावजूद सुधार न होने पर अंततः उनके नवंबर माह के वेतन पर रोक लगा दी गई है। पालिकाध्यक्ष डा. आस्था अग्रवाल ने कहा कि ईओ की कार्यशैली ठीक नहीं है, जिससे शहर के विकास कार्यों में देरी हो रही है। इस संबंध में उन्हें नोटिस जारी कर वेतन रोका गया है और स्पष्टीकरण मांगा गया है।
