फर्रुखाबाद सीएचसी में ऑक्सीजन खत्म, अस्थमा पीड़ित वृद्ध की मौत, परिजनों का हंगामा
फर्रुखाबाद में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक और शर्मनाक चेहरा सामने आया है, जहाँ एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में ऑक्सीजन खत्म होने के कारण एक अस्थमा के मरीज की जान चली गई। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही को उजागर किया है। मरीज के परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज न मिलने और ऑक्सीजन की कमी के चलते उनके प्रियजन की मौत हुई है।nnसूत्रों के अनुसार, नवाबगंज कस्बे के रहने वाले नन्हेंलाल गुप्ता (उम्र 70 वर्ष), जो अस्थमा से पीड़ित थे, की मंगलवार शाम को सांस फूलने लगी। निजी चिकित्सकों को दिखाने के बाद जब उनकी हालत बिगड़ने लगी, तो परिजन उन्हें शाम करीब छह बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। अस्पताल में फार्मासिस्ट सर्वेश श्रीवास्तव और वार्ड ब्वाय अजय कुमार ने नन्हेंलाल को ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर उनकी स्थिति को स्थिर करने का प्रयास शुरू किया।nnहालांकि, कुछ ही देर में ऑक्सीजन सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म हो गई। ऑक्सीजन के अभाव में, फार्मासिस्ट ने नन्हेंलाल गुप्ता को डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल रेफर करने का निर्णय लिया। इस देरी और ऑक्सीजन की अनुपलब्धता से गुस्साए परिजनों ने फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय के साथ हाथापाई और गाली-गलौज की। सीएचसी के अधीक्षक डॉ. लोकेश शर्मा ने घटना की सूचना पुलिस को दी।nnजब तक पुलिस मौके पर पहुंचती, तब तक गुस्साए परिजन नन्हेंलाल गुप्ता को एक एंबुलेंस से डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल ले गए। दुर्भाग्यवश, अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में नन्हेंलाल गुप्ता ने दम तोड़ दिया। लोहिया अस्पताल के चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।nnथाना प्रभारी अवध नारायण पांडे ने बताया कि सीएचसी अधीक्षक ने सूचना दी थी कि अस्पताल में मरीज के परिजनों द्वारा चिकित्सा कर्मियों के साथ हाथापाई और गाली-गलौज की जा रही है, जिसके बाद पुलिस को भेजा गया था।nnवहीं, सीएचसी के अधीक्षक डॉ. लोकेश शर्मा ने एक अलग बयान देते हुए कहा कि ऑक्सीजन खत्म नहीं हुई थी, बल्कि सिलेंडर से सप्लाई में कुछ दिक्कत आ गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक इस दिक्कत को दूर करने का प्रयास किया जा रहा था, तब तक परिजनों ने चिकित्सा कर्मियों के साथ हाथापाई कर दी।nnइस घटना ने फर्रुखाबाद के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसे हादसों के बाद व्यवस्था में वाकई कोई सुधार होगा, या यह सिर्फ एक और मामला बनकर रह जाएगा।”
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