फर्जी डोडा बरामदगी: सेवानिवृत्त दारोगा दोषी करार, युवक को भेजा था जेल
बागपत की अदालत ने डोडा बरामदगी के एक फर्जी मामले में एक सेवानिवृत्त दारोगा को दोषी करार दिया है, जबकि एक अन्य पुलिसकर्मी को बरी कर दिया है। यह मामला वर्ष 2015 का है, जब एक युवक को कथित तौर पर फर्जी डोडा बरामदगी के आरोप में जेल भेजा गया था। अदालत ने दोषी दारोगा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है, क्योंकि वह फैसला सुनाए जाने से पहले ही फरार हो गया था। इस मामले की सजा पर शनिवार को सुनवाई होनी है।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब खेकड़ा थाने में वर्ष 2018 में एक मुकदमा दर्ज कराया गया। इसमें बताया गया कि 2015 में एक अनुसूचित जाति के युवक रवि को तत्कालीन दारोगा अमन सिंह ने गिरफ्तार करने का दावा किया था, जबकि फर्द तत्कालीन एचसीपी बिजेंद्र सिंह ने तैयार की थी। रवि के पिता ने पुलिस पर बेटे को फर्जी तरीके से फंसाने का आरोप लगाया था।
मामले की जांच मेरठ क्राइम ब्रांच से कराई गई, जिसमें यह पुष्टि हुई कि रवि के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई थी। दोनों पुलिसकर्मियों पर रवि को अवैध हिरासत में रखने, जेल भेजने के लिए झूठे साक्ष्य तैयार करने, एनडीपीएस एक्ट और एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। दोनों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई थी।
एडीजे विशेष एससी-एसटी एक्ट पवन कुमार राय की अदालत में विचाराधीन इस मामले में, दोनों पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो गए थे। गुरुवार को अदालत ने सेवानिवृत्त दारोगा अमन सिंह पर गलत साक्ष्य तैयार करने, युवक को अवैध हिरासत में रखने और एससी-एसटी एक्ट के तहत दोष सिद्ध किया, जबकि बिजेंद्र सिंह को इस मामले में दोषमुक्त कर दिया। हालांकि, एनडीपीएस एक्ट की धारा में दोनों को दोषमुक्त कर दिया गया।
यह मामला तब और भी सुर्खियों में आया था जब युवती के पिता से मिलीभगत कर पुलिस द्वारा युवक से डोडा बरामद कर जेल भेजने का आरोप लगा था। इसके बाद युवती की जाति के लोगों ने खाप पंचायत बुलाकर उसे और उसकी बहन को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाने का फरमान सुनाया था, जिसने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरी थीं। इस मामले को लेकर विभिन्न देशों से पुलिस को 200 से अधिक निंदा पत्र प्राप्त हुए थे।
