फिरोजाबाद। सरकार 'खेलो इंडिया' जैसे आयोजनों के माध्यम से खेल को बढ़ावा देने का दावा कर रही है, लेकिन जिले में जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को विकसित करने के प्रयास अपर्याप्त दिखाई देते हैं।...
फिरोजाबाद। सरकार ‘खेलो इंडिया’ जैसे आयोजनों के माध्यम से खेल को बढ़ावा देने का दावा कर रही है, लेकिन जिले में जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को विकसित करने के प्रयास अपर्याप्त दिखाई देते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां बेटियां खेल का अभ्यास कर सकें, ऐसे खेल मैदानों का अभाव है। प्रशिक्षित कोचों की अनुपस्थिति भी एक बड़ी बाधा है। बेटियां खेलना चाहती हैं, लेकिन उन्हें अपना हुनर दिखाने के लिए मंच नहीं मिल पा रहा है। स्कूलों और कॉलेजों में भी खेल के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है, जिससे खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता।
इसके बावजूद, कई बेटियां विभिन्न खेल एसोसिएशनों की मदद से किसी तरह प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं और अपने सपनों को पूरा करने के लिए जुटी हुई हैं। फिरोजाबाद में दर्जनों ऐसी बेटियां हैं जिनके स्कूलों में खेल आयोजित नहीं होते और गांव में खेलने के लिए कोई स्थान नहीं है। ये बेटियां जिला एथलेटिक्स एसोसिएशन से जुड़ी हैं, जो 15 प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण दे रही है। इसके अलावा, श्यामवीर दद्दा स्पोर्ट्स डेवलपमेंट ट्रस्ट प्रतिभावान खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए यात्रा व्यय में भी सहायता करता है।
इन बेटियों का कहना है कि उन्हें खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एक अवसर की आवश्यकता है। ‘बोले फिरोजाबाद’ के तहत जब इन बेटियों से बात की गई, तो हर किसी की जुबां पर एक ही बात थी कि स्कूलों और कॉलेजों में खेल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। महिला खिलाड़ियों ने बताया कि स्टेडियम आबादी से दूर होने के कारण अभिभावक उन्हें भेजने से कतराते हैं, जिससे उन्हें आने-जाने में भी परेशानी होती है। उन्होंने सरकार से स्कूलों में खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने और हर स्कूल-कॉलेज में खेल को अनिवार्य करने की मांग की। साथ ही, छात्राओं के लिए स्टेडियम को सुलभ बनाने पर भी जोर दिया ताकि वे बेहतर ढंग से तैयारी कर सकें।
दूर-दराज के गांवों से छात्राएं अपनी धनराशि खर्च कर आरके कॉलेज में संचालित प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण लेने आती हैं। उनकी मांग है कि कम से कम न्याय पंचायत स्तर पर मिनी स्टेडियम बनाए जाएं और उनमें आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएं, ताकि छात्राएं सुरक्षित माहौल में अभ्यास कर सकें। शहर की कई छात्राओं ने यह भी बताया कि उनके घर के आसपास कोई मैदान न होने के कारण उन्हें सड़क पर ही दौड़ और कूद का अभ्यास करना पड़ता है, जिससे चोट लगने का खतरा बना रहता है।
प्रिया यादव, नानपी ने बताया, “स्कूलों में खेलों का अभ्यास नहीं कराया जाता है। कहीं पर मैदान भी नहीं हैं। हम अपने गांव से काफी दूर यहां पर अभ्यास करने आते हैं। खेलों से शरीर फिट होने की बात स्कूलों में होती है, लेकिन अभ्यास नहीं कराते।”
शिवानी, अलहदादपुर का कहना है, “हम अपने स्तर से ही खेलों की तैयारी कर रहे हैं, ताकि हम खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। इससे शारीरिक रूप से भी फिट रहते हैं तथा मैं चाहती हूं कि जिले से मंडल एवं राष्ट्रीय स्तर के खेलों में प्रतिभाग कर सकूं।”
इशिता, रसीदपुर कनैटा ने कहा, “हम 400 मीटर की हर्डल दौड़ का अभ्यास करते हैं। सरकार खेलो इंडिया की बात करती है, लेकिन गांव में खेल को बढ़ावा देने के लिए कोई साधन नहीं हैं। आसपास के गांवों में भी कहीं कोई स्टेडियम नहीं है, जहां पर हम अभ्यास कर सकें।”
संध्या, भीकनपुर मेघपुर ने बताया, “हम रोज दौड़ का अभ्यास करते हैं। गांव से यहां तक आने में भी काफी वक्त लगता है, लेकिन हमारी दौड़ में रुचि है तथा हम दौड़ में राष्ट्रीय स्तर तक की प्रतियोगिता में भाग लेना चाहते हैं।”
पायल, नगला मिर्जा ने कहा, “हम भाला फेंक का अभ्यास करते हैं। अभी तक 35 मीटर तक भाला फेंक देते हैं। स्कूल में तो कोई अभ्यास नहीं होता है लिहाजा यहां पर प्रेक्टिस करने आते हैं। हम इंडिया के लिए खेलना चाहते हैं, सरकार को महिला खिलाड़ियों की मदद करनी चाहिए।”
शिवानी यादव, जलालपुर ने बताया, “हम लांग जंप के साथ में कबड्डी एवं खो-खो भी खेलते हैं। खेलने से शरीर चुस्त रहता है तो मस्तिष्क भी तेज होता है। हम दौड़ के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर खेलना चाहते हैं। तीन साल से निरंतर यहां पर आकर अभ्यास कर रहे हैं।”
भावना ने कहा, “हम 100 मीटर दौड़ का अभ्यास कर रहे हैं। हर रोज दौड़ने से शरीर में चुस्ती एवं फुर्ती आती है तो पढ़ाई में भी मन लगता है। हम एथलेटिक्स में दौड़ प्रतियोगिता में प्रतिभाग करना चाहते हैं।”
काजल, पृथ्वीपु ने बताया, “हम प्रतिदिन दौड़ एवं ऊंची कूद का अभ्यास करते हैं, लेकिन हमारा विशेष ध्यान दौड़ पर है। हम इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं तथा सड़क पर ही अभ्यास करते हैं। सरकार को गांवों में खेल सुविधाएं बढ़ाने पर जोर देना चाहिए।”