फिरोजाबाद में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। भले ही सरकार गांवों के विकास के लिए बड़ी धनराशि आवंटित कर रही हो, लेकिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की कथित...
फिरोजाबाद में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। भले ही सरकार गांवों के विकास के लिए बड़ी धनराशि आवंटित कर रही हो, लेकिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की कथित मनमानी के चलते इसका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। ब्लॉक स्तर के अधिकारी या तो इन जनप्रतिनिधियों के आगे बेबस नजर आ रहे हैं या फिर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं। ओडीएफ प्लस (खुले में शौच से मुक्त प्लस) अभियान के तहत गांवों को स्वच्छता के लिए बड़ी धनराशि दी गई थी। इस धनराशि का मुख्य उद्देश्य घरों से निकलने वाले गंदे पानी के निस्तारण की व्यवस्था करना और गांव में स्वच्छता का संदेश फैलाना था। लेकिन फिरोजाबाद के भीकनपुर मेघपुर के आंबेडकर आश्रम मोहल्ले की तस्वीर इन दावों की पोल खोलती है।
इस मोहल्ले में घुसते ही विकास की हकीकत सामने आ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि ओडीएफ प्लस के तहत मिली धनराशि का एक हिस्सा भी उनकी गलियों तक नहीं पहुंचा है। मोहल्ले की महिलाएं और पुरुष बताते हैं कि गलियों में नालियां तक नहीं हैं, जिससे घरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे सड़कों पर बहता है। इससे न केवल गंदगी का साम्राज्य बना हुआ है, बल्कि लोगों का गलियों से निकलना भी मुश्किल हो गया है। यह गंदा पानी और कचरा खाली पड़े प्लॉटों में जमा होकर बीमारियों को न्योता दे रहा है।
ग्रामीणों ने बिजली विभाग द्वारा पोल गाड़ने का जिक्र करते हुए कहा कि वोट बटोरने वाले जनप्रतिनिधि उनकी गलियों और नालियों की सुध लेने तक नहीं आए। मुख्य सड़क से आंबेडकर आश्रम तक जाने वाली गली की हालत इतनी खराब है कि बाइक सवारों को अक्सर गिरने का डर बना रहता है। ग्रामीणों का मानना है कि ब्लॉक के अधिकारियों को विकास प्रस्ताव बनाने से पहले धरातल पर जाकर जमीनी हकीकत का जायजा लेना चाहिए कि वास्तव में विकास की जरूरत कहां है।
संचारी रोग नियंत्रण अभियान पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह अभियान गांवों में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए चलाया गया था, लेकिन आंबेडकर आश्रम क्षेत्र की गलियों में बहते गंदे पानी और गंदगी से भरे प्लॉट इस अभियान की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। क्या स्वास्थ्य विभाग ने भी इस अभियान के नाम पर केवल खानापूर्ति की, यह बड़ा सवाल है।
ग्रामीणों की मानें तो गांव में आबादी वाले क्षेत्रों में जहां नालियां और पक्की सड़कें नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर खेतों में सड़कें बनवाई जा रही हैं। यहां तक कि फैक्ट्रियों तक सड़कें बना दी गई हैं। यह सवाल उठता है कि आबादी के बाहर गांव के विकास के लिए आने वाला धन किस नियम के तहत और क्यों खर्च किया जा रहा है। ब्लॉक अधिकारियों को इस अनियमितता पर ध्यान देने की फुर्सत नहीं है।
स्थानीय निवासी सुनीता ने कहा, “हमारे क्षेत्र में सड़कों का निर्माण नहीं कराया है। मुख्य सड़क से अंदर आने पर भी काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। रात में महिलाएं एवं बुजुर्गवार भी गुजरते वक्त गिर जाते हैं। ग्राम प्रधान द्वारा क्षेत्र की अनदेखी की जा रही है।”
शंकरलाल ने बताया, “गांव में कई जगह पर विकास कार्य चल रहा है, लेकिन इस हिस्से में अभी तक सड़क एवं नालियों का निर्माण नहीं कराया है। लोगों को निकलने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्राम प्रधान द्वारा क्षेत्र में विकास नहीं कराया जा रहा है।”
ऊषा देवी ने कहा, “ग्राम प्रधान ही नहीं, सरकारी विभागों द्वारा भी क्षेत्र की अनदेखी की जा रही है। बिजली के पोल जब लगे थे तो डीपी के लिए भी 18500 रुपये लोगों को चंदा कर एकत्रित करने पड़े थे। लेकिन उस वक्त तो विद्युत विभाग ने कोई ध्यान ही नहीं दिया।”
गोलू ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “क्षेत्र में राह निकलने में भी काफी दिक्कत होती है। मुख्य सड़क से जब मोहल्ले की तरफ मुड़ते हैं तो कई बार बाइक फिसलते-फिसलते बचती है। एक गली को भी आधा बनाकर छोड़ दिया है, उसका पानी भी अन्य गलियों में ही भरता है।”
शकुंतला देवी ने कहा, “समस्याओं की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। सरकार ओडीएफ प्लस अभियान चला रही है, ताकि गांव साफ रहें। यहां तो घरों से निकलने वाला गंदा पानी बाहर ही एकत्रित हो रहा है। ओडीएफ प्लस के तहत होने वाले कार्य की निगरानी नहीं की जा रही है।”
नवाब सिंह ने कहा, “क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। गली में निकलने के लिए भी रास्ता देखना पड़ता है, कहीं घरों के बाहर गंदा पानी सड़क पर ही बह रहा है तो कई बार बच्चे भी गिरकर चुटैल हो जाते हैं। प्रधान ने यहां पर कोई भी कार्य नहीं कराया है।”
एक अन्य निवासी ने बताया, “दुपहिया वाहन से निकलना भी मुश्किल है। हमारी बाइक खुद एक दो बार गिर पड़ी है, गनीमत यह रही कि उससे कोई हादसा नहीं हुआ। कम से कम सड़क एवं नालियों का निर्माण तो कराया जाना चाहिए।”