‘राजस्व महाभियान’ की धीमी रफ्तार से लोग परेशान, 6189 आवेदनों में से 3 महीने में सिर्फ 17 हुए ऑनलाइन
बिहार के पताही अंचल में भूमि संबंधी अभिलेखों में सुधार के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्व महाभियान योजना में प्राप्त आवेदन प्रपत्रों को पोर्टल पर अपलोड करने में विभाग उलझा हुआ है। आवेदनों के निष्पादन के लिए बड़ी संख्या में रैयत अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं।
विभागीय शिथिल शिथिलता के कारण महाभियान के तहत प्राप्त 6 हजार 189 आवेदन पत्रों की सुनवाई में वर्षों बीत जाएंगे। बताते हैं कि पताही अंचल की सभी पंचायत में राजस्व महाभियान के तहत कुल 30 शिविर लगाए गए थे। इन शिविरों में जमीन का नामांतरण, उत्तराधिकार, बंटवारा, आनलाइन जमाबंदी की त्रुटि में सुधार करने की रैयतों में उम्मीद जगी थी। इसके लिए पंचायत स्तर पर दो-दो बार शिविर का आयोजन राजस्व विभाग द्वारा किया गया।
पताही अंचल के 15 ग्राम पंचायतों में आयोजित शिविर में मात्र 6189 आवेदन प्रपत्र भरकर जमा किए गए। विभागीय सक्रियता का आलम यह है कि तीन महीने में मात्र 17 आवेदन प्रपत्रों को ही आनलाइन अपलोड किया गया है। तीन महीने की लंबी अवधि के बाद भी संबंधित मामलों के निष्पादन को लेकर रैयत परेशान हैं। अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं।
दूसरी तरफ दलालों की सक्रियता भी देखी जा रही है। रैयत चुमन सिंह, अरुण कुमार सिंह, दीपक कुमार, मिंटू सिंह, लाल बाबू सिंह, केदार यादव, सरोज पांडे ने बताया कि अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार, मनमानी, बेलगाम अधिकारी और कर्मचारियों के कारण आवेदन पत्रों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही है और न हल किया जा रहा है। उम्मीद है कि इस गंभीर मामले पर सरकार जरूर ध्यान देगी।
आवेदनों की अपलोडिंग की रफ्तार को देखकर डीसीएलआर सुनिधि के निर्देश पर सीओ नाजनी अकरम ने अंचल के सभी हल्का कर्मचारी, सर्वे अमीन, अंचल अमीन सहित अन्य स्टाफ को बिहार भूमि पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने में लगाया। गुरुवार को पूरा दिन कर्मचारी अपने अन्य कार्य छोड़कर सिर्फ दस्तावेज अपलोड करने में जुटे रहे। फिर भी काम की गति उम्मीद के अनुसार तेज नहीं हो सकी।
राजस्व महाभियान में जमा किए गए आवेदन पत्रों के अपलोड होने के बाद उसके निष्पादन का काम शुरू किया जाएगा। आवेदन जमा करने वाले सभी रैयतों को नोटिस देकर बुलाया जाएगा।
