पुतिन की भारत यात्रा: ₹5 लाख करोड़ के व्यापार घाटे को पाटने का सुनहरा अवसर
नई दिल्ली। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा पर दुनिया की पैनी नजर है। इस यात्रा से भारत के पास रूस के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करने का एक बड़ा अवसर है। वर्तमान में यह व्यापार घाटा पिछले वित्त वर्ष में लगभग 59 अरब डॉलर, यानी 5,32,025 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। ऐसे में, भारत के पास इस घाटे को पाटने के लिए एक सुनहरी योजना है, जिसके तहत रूस को कुछ खास वस्तुएं निर्यात की जा सकती हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, रूस को मजबूत निर्यात के लिए भारत की संभावनाएं इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्युटिकल्स, रसायन और कृषि जैसे क्षेत्रों में सबसे अधिक हैं। रूस में इन उच्च-मूल्य वाले उत्पादों की भारी मांग है। इन प्रमुख क्षेत्रों के अलावा, कपड़ा, परिधान, चमड़े के सामान, हस्तशिल्प, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और हल्के इंजीनियरिंग जैसे श्रम-केंद्रित उद्योगों में भी पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। रूस के विशाल उपभोक्ता आधार और भारत की लागत प्रतिस्पर्धात्मकता को देखते हुए, इन क्षेत्रों से निर्यात बढ़ाने से रूस के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को प्रभावी ढंग से पाटने में मदद मिलेगी।
वर्तमान में, रूस के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी केवल 2.3 प्रतिशत है, जबकि भारत के वैश्विक निर्यात में रूस की हिस्सेदारी 1.1 प्रतिशत है। इंजीनियरिंग सामानों के क्षेत्र में सबसे बड़ा अंतर देखा जा रहा है, जहाँ भारत केवल नौ करोड़ डॉलर का निर्यात करता है, जबकि रूस इस क्षेत्र में 2.8 अरब डॉलर का आयात करता है। इसी तरह, रसायन और प्लास्टिक के क्षेत्र में भी भारत 4.06 अरब डॉलर की कुल मांग में से केवल 13.5 करोड़ डॉलर का योगदान देता है। फार्मास्युटिकल्स भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहाँ भारत 54.6 करोड़ डॉलर की आपूर्ति करता है, जबकि रूस का फार्मा आयात खर्च 9.76 अरब डॉलर तक पहुँच जाता है।
अधिकारियों का मानना है कि भारत के निर्यात विस्तार का अगला चरण भारत के वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों और रूस की बड़ी, लेकिन कम सेवा वाली आयात जरूरतों के बीच एक मजबूत तालमेल पर निर्भर करता है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। उम्मीद है कि राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा के दौरान भारत और रूस व्यापार, स्वास्थ्य सेवा और अन्य कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे। यह दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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